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हरदीप पुरी, स्मृति ईरानी, हरीश को टिकट नहीं; क्यों भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में लगाया नए चेहरों पर दांव | up-bjp-rajya-sabha-list-smriti-irani-hardeep-puri-ticket-explained



नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी ने सोमवार को 8 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी. इस लिस्ट में जिन लोगों के नाम हैं, उनके बारे में चर्चा ही नहीं थीं. बीजेपी ने जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया है, उसके जरिए पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है. आने वाले विधानसभा चुनाव का भी ध्यान रखा गया है.

पिछले कई दिनों से कई नामों को लेकर अटकलें लग रही थीं. जिन नामों को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा हो रही थी, उनमें स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी के अलावा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम भी था. साथ ही पूर्व सांसद कौशल किशोर और संजीव बालियान के नामों की भी चर्चा थी.

स्मृति ईरानी को क्यों नहीं मिला टिकट?

बीजेपी ने नए-नए नियुक्त हुए महासचिवों को तुरंत राज्यसभा भेजने की परंपरा नहीं रही है. बीते एक दशक में जितने भी महासचिव राज्यसभा गए हैं, उनके यह पद संभालने के काफी अंतराल के बाद ही उन्हें मौका दिया गया. 

पूर्व महासचिव अरुण सिंह से लेकर वर्तमान महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े तक, महासचिवों को मौका संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद मिला. एक उदाहरण महासचिव सुनील बंसल का भी है जिन्हें अभी तक पार्टी ने राज्यसभा नहीं भेजा है जबकि वे लंबे समय से इस पद पर हैं. 

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने यह तय किया था कि लोकसभा चुनाव हारे नेताओं को राज्यसभा का टिकट नहीं देना है. यही कारण है कि अमेठी से हारीं स्मृति ईरानी, बस्ती से हारे हरीश द्विवेदी, मोहनलालगंज से हारे कौशल किशोर और मुजफ्फरनगर से हारे संजीव बालियान को टिकट नहीं मिला.

पूर्व सांसद प्रियंका रावत को टिकट मिला है लेकिन 2014 में बाराबंकी से चुनाव जीतने के बाद उन्हें 2019 और 2024 में टिकट नहीं मिला था. 2024 के लोक सभा चुनाव में ओबीसी वर्ग में कुर्मी और दलित वर्ग में पासी बीजेपी के पाले से छिटक कर सपा के पाले में चले गए थे. पासी उम्मीदवार की तलाश प्रियंका रावत से पूरी हुई तो वहीं कुर्मी उम्मीदवार की तलाश श्रुति गंगवार से. दोनों महिलाएं भी हैं.

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पुरी और वर्मा को टिकट क्यों नहीं?

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा का कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला है. दोनों केंद्रीय मंत्री हैं. माना जा रहा था कि यूपी से दोनों को राज्यसभा भेजा जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ?

बताया जा रहा है कि हरदीप सिंह पुरी के प्रदर्शन से प्रधानमंत्री मोदी संतुष्ट हैं. ईरान संकट के दौरान जिस तरह से भारत ने कच्चे तेल की खरीद को डाइवर्सिफाई किया, उससे ईंधन संकट पैदा नहीं हुआ. हालांकि पुरी को पार्टी दो बार राज्यसभा भेज चुकी है. उन्हें लोकसभा का चुनाव भी लड़ाया गया था लेकिन वे हार गए. 

उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है. इसके बाद भी वे छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं. यह देखना होगा कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें कैबिनेट में तब तक रखा जाएगा या नहीं. वे फिलहाल मोदी कैबिनेट के अकेले सिख मंत्री हैं.

वहीं, बीएल वर्मा पश्चिमी यूपी के मजबूत लोध चेहरा हैं. वे यूपी बीजेपी के अध्यक्ष बनने के भी प्रबल दावेदार थे. लेकिन कुर्मी समाज के पंकज चौधरी को यह पद मिला. अब वर्मा की जगह लोध समाज से ही आने वाले और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजा जा रहा है.

बीजेपी की इस लिस्ट से संदेश साफ है कि मिशन 2027 को ध्यान में रख कर ही फैसला किया गया है. लेकिन पार्टी ने नेताओं को एक अहम संदेश भी दिया है कि संगठन में काम करते रहें, पार्टी देर-सवेर मौका जरूर देगी. 

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