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संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी, देखना चाहेंगे कि बदलाव किसने किया… SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट | Supreme Court chief Justice Surya Kant Election Commission Form 6 CEC Gyanesh Kumar


नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोजन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हमने ऐसे किसी भी फॉर्म को अप्रूव नहीं किया है. यह स्पष्ट कर दें. जब रिकॉर्ड हमारे सामने आएगा तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया.

मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दावा किया गया था कि कुछ राज्यों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ लगाए गए नए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है.

नए फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पहले से विवाद का विषय हैं. सामने आया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने इन बदलावों पर आपत्ति जताई थी. ⁠उनका कहना था कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन किए बिना ये बदलाव नहीं किए जा सकते. बाद में ये रिपोर्ट सामने आई कि चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद नया घोषणा-पत्र लागू कर दिया गया.
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इसके बाद चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संकेत दिया था कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अदालत ने फॉर्म-6 के नए घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था.

हालांकि, बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सामने नए फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र की जांच का अवसर ही नहीं आया था, क्योंकि नया प्रारूप फैसला आने के बाद लागू किया गया था.

नए फॉर्म-6 में क्या बदलाव है?

नए घोषणा-पत्र में नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने वाले व्यक्ति को यह बताना होगा कि क्या वह स्वयं या उसके माता-पिता पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची से जुड़े या चिन्हित किए गए थे. पहले इस्तेमाल किए गए फॉर्म-6 में ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाती थी.

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी से कहा कि याचिका में की गई प्रार्थनाएं व्यापक और “उलझी हुई” प्रतीत होती हैं. उन्होंने कहा कि वह याचिका में की गई प्रार्थनाओं पर कायम हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाले एक समान मामले के साथ जोड़ दिया.

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