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MP: स्कॉलरशिप के नाम पर करोड़ों का खेल! जिन MBA छात्रों ने आवेदन नहीं किया, उनके नाम पर खुले बैंक खाते | bhopal scholarship scam cbi investigation uco bank fraud case mba students fraud fake accounts



मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सरकारी छात्रवृत्ति से जुड़ा एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि जिन छात्रों ने कभी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन तक नहीं किया, उनके नाम पर बैंक खाते खोल दिए गए. इन खातों में सरकार की छात्रवृत्ति की रकम भेजी गई और फिर कॉलेज प्रबंधन और बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से पूरा पैसा निकाल लिया. 

करीब एक करोड़ रुपये के इस घोटाले का खुलासा होने के बाद CBI ने बैंक मैनेजर समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. अब जांच इस बात की भी हो रही है कि कहीं यह फर्जीवाड़ा दूसरे कॉलेजों और दूसरे खातों तक तो नहीं फैला हुआ था.

CBI की शुरुआती जांच आई सामने

सरकारी छात्रवृत्ति का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई में मदद करना होता है, लेकिन भोपाल में इसी योजना को कथित तौर पर कमाई का जरिया बना दिया. CBI की शुरुआती जांच में सामने आया है कि जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच भोपाल के एक निजी मैनेजमेंट कॉलेज से जुड़े लोगों और यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के अधिकारियों ने मिलकर बेहद सुनियोजित तरीके से स्कॉलरशिप का पैसा हड़प लिया.

CBI के मुताबिक इस पूरे मामले में 118 बैंक खाते खोले गए. ये खाते MBA छात्रों के नाम पर थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन छात्रों के नाम पर खाते खुले, उनमें से कई को इसकी जानकारी तक नहीं थी. यानी छात्र न तो बैंक गए, न उन्होंने कोई फॉर्म भरा और न ही उन्होंने स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया, लेकिन उनके नाम पर बैंक खाते खुल गए और उनमें सरकार की छात्रवृत्ति की रकम भी पहुंच गई.

जांच एजेंसी का कहना है कि इन खातों में करीब 99 लाख 48 हजार रुपये की सरकारी छात्रवृत्ति जमा हुई. लेकिन यह पैसा छात्रों तक पहुंचने से पहले ही निकाल लिया गया. शुरुआती जांच में यही सामने आया है कि पूरी रकम को सुनियोजित तरीके से निकालकर गबन किया.

यूको बैंक ने दर्ज करवाई शिकायत 

यह पूरा मामला तब सामने आया जब यूको बैंक के भोपाल ज़ोनल हेड और डिप्टी जनरल मैनेजर लोकेश कुमार ने बैंक में संदिग्ध लेनदेन और खातों के संचालन को लेकर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद CBI ने प्रारंभिक जांच शुरू की. जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, खाता खोलने से जुड़े दस्तावेज और स्कॉलरशिप के भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई. इसी जांच में कई बड़े खुलासे हुए.

CBI की एफआईआर के मुताबिक घोटाले की शुरुआत बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया से ही हुई. आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए अकाउंट ओपनिंग फॉर्म तैयार किए. इन फॉर्मों पर छात्रों के नकली हस्ताक्षर किए गए. कई जगह व्यक्तिगत जानकारी भी गलत भरी गई. बैंक में खाते खोलने के लिए जरूरी KYC प्रक्रिया को या तो पूरी तरह नजरअंदाज किया गया या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पूरा दिखाया गया.

कॉलेज की ओर से दिए फर्जी सर्टिफिकेट

जांच में यह भी सामने आया कि खाते खोलने के लिए कॉलेज की ओर से जो बोनाफाइड सर्टिफिकेट दिए गए, वे भी फर्जी थे. यानी छात्रों के नाम पर ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनके आधार पर बैंक को यह भरोसा दिलाया गया कि खाते वास्तविक छात्रों के हैं.

इसके बाद घोटाले का दूसरा चरण शुरू हुआ. आरोप है कि बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर छात्रों के बजाय कॉलेज अधिकारियों या उनके करीबी लोगों के लगाए गए. इसका फायदा यह हुआ कि खाते से जुड़ा हर OTP उन्हीं लोगों के मोबाइल पर आता था. यानी खाते पर पूरा नियंत्रण छात्रों के बजाय आरोपियों के पास था.

इतना ही नहीं, बैंक की ओर से जारी किए गए एटीएम कार्ड भी छात्रों को नहीं दिए गए. CBI के अनुसार सभी डेबिट कार्ड कॉलेज के कर्मचारी राम सिंह वर्मा को सौंप दिए गए. जबकि बैंकिंग नियमों के मुताबिक एटीएम कार्ड सीधे खाताधारक को दिया जाना चाहिए या फिर उसकी लिखित अनुमति होनी चाहिए. जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया.

जैसे ही सरकार की ओर से स्कॉलरशिप की रकम खातों में पहुंचती थी, आरोपी एटीएम कार्ड और OTP का इस्तेमाल करके पैसा निकाल लेते थे. कई मामलों में रकम जमा होने के तुरंत बाद निकासी कर ली गई ताकि छात्रों को भनक तक न लगे.

यूको बैंक के मैनेजर की भी संदिग्ध भूमिका 

CBI का आरोप है कि यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा ने भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई. जांच एजेंसी का कहना है कि बैंक मैनेजर की जिम्मेदारी थी कि खाते खोलने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच करतीं, KYC पूरी करवातीं, मोबाइल नंबर की पुष्टि करतीं और एटीएम जारी करने की प्रक्रिया का पालन करवातीं. लेकिन आरोप है कि इन सभी नियमों की अनदेखी की गई और बैंकिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई.

CBI का कहना है कि बैंक अधिकारी और कॉलेज प्रशासन ने आपराधिक साजिश के तहत मिलकर सरकारी धन का गबन किया. इसलिए इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने जैसी गंभीर धाराएं भी लगाई हैं.

घोटाले में सामने आए आरोपियों के नाम

इस मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है उनमें यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा, भोपाल के एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा, प्रोफेसर आदित्य मल्होत्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर विनेश मेश्राम और कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा शामिल हैं. CBI ने एफआईआर में अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है, जिससे साफ है कि जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है.

हालांकि आरोपियों की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया है. कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा का कहना है कि बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और उनका नाम अब CBI की जांच में सामने आया है. वहीं कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग कर रहा है और स्कॉलरशिप योजना में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है.

सीबीआई की जांच अभी भी जारी

अब CBI इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह सिर्फ 118 खातों तक सीमित मामला है या फिर इसी तरह के फर्जी खाते दूसरे छात्रों और दूसरे संस्थानों में भी खोले गए थे. एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घोटाले में शामिल लोगों ने सरकारी पैसे का इस्तेमाल कहां किया, किसके खातों में रकम ट्रांसफर हुई और क्या इस पूरे नेटवर्क में और भी बैंक अधिकारी या कॉलेज कर्मचारी शामिल थे.

जांच एजेंसी बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, एटीएम से निकासी का पूरा डेटा, CCTV फुटेज और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.




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