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चिता पर साथ लेटीं 11 महिलाएं, 6 ने लगाई प्रतीकात्मक फांसी; केन-बेतवा प्रभावितों का आंदोलन 10वें दिन भी जारी | ken betwa link project chhatarpur chita andolan hunger strike land acquisition compensation mp


एमपी के छतरपुर में चल रहा “चिता आंदोलन” अब सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने हक और पहचान की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है. रविवार को आंदोलन का सबसे भावुक और प्रतीकात्मक दृश्य तब सामने आया, जब 11 ग्रामीण महिलाएं चिता पर लेट गईं और 6 महिलाओं ने प्रतिकात्मक फांसी लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया. 

उनका कहना है कि जमीन, मकान और आजीविका छिन जाने के बाद वे खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रही हैं. केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उचित मुआवजा और पुनर्वास के बिना उन्हें विस्थापन का दर्द झेलना पड़ रहा है. इसी मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है.

दसवें दिन भी जारी रहा चिता आंदोलन

केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा चिता आंदोलन रविवार को दसवें दिन भी जारी रहा. आंदोलनकारियों का कहना है कि बारिश, गर्मी और प्रशासनिक दबाव जैसी चुनौतियों के बावजूद आंदोलन में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है. आंदोलन स्थल पर मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे कार्यक्रम लगातार जारी हैं.

आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर

परियोजना प्रभावितों को न्याय दिलाने और कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं. आंदोलनकारियों के मुताबिक अनशन के सातवें दिन उनके स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है और उनका करीब पांच किलोग्राम वजन कम हो गया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि अब तक प्रशासन की ओर से उनका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया है.

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आंदोलन कर रहीं बुजुर्ग महिलाओं ने चेहरे पर कीचड़ लगाकर विरोध किया.  

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बढ़ा विवाद

आंदोलन के दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है. प्रशासन की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कथित तौर पर कहा गया था कि आंदोलन स्थल पर केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित लोग मौजूद नहीं हैं. इसके जवाब में अमित भटनागर ने प्रभावित महिलाओं के साथ एक वीडियो जारी किया. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार लगातार आंदोलन में शामिल हैं और प्रशासन का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है.

कई परियोजनाओं के प्रभावित परिवार जुटे

जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना ही नहीं, बल्कि मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं. आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई लोगों की जमीन और मकान अधिग्रहित कर लिए, लेकिन उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला. उनका कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया भी संतोषजनक नहीं रही है.

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 अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं.

भूमि अधिग्रहण पर उठाए सवाल

अमित भटनागर ने भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि अधिग्रहण का काम भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून की भावना के अनुरूप नहीं हुआ. उन्होंने खरियानी गांव के स्कूल भवन को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

मुआवजा वितरण में अनियमितता के आरोप

आंदोलनकारियों का कहना है कि परियोजनाओं में मुआवजा वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. उनका आरोप है कि कई वास्तविक पात्र परिवारों को उनका हक नहीं मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया. साथ ही परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की जा रही है.

न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

आंदोलन में शामिल लोगों ने साफ किया है कि जब तक विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन और मुआवजे की नहीं, बल्कि सम्मान और भविष्य की भी है.

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विरोध कर रही महिलाओं ने प्रतिकात्मक रूप से फांसी भी लगाई.  

क्रमिक अनशन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल

आमरण अनशन के साथ-साथ क्रमिक अनशन में भी बड़ी संख्या में ग्रामीण हिस्सा ले रहे हैं. इनमें सोमरनी आदिवासी, रामकली आदिवासी, हरवाई आदिवासी, पानबाई आदिवासी, कलावती आदिवासी, चम्पा आदिवासी, मझली बहू आदिवासी, अंगी बाई आदिवासी, अगना बाई आदिवासी, आशा आदिवासी, रानी आदिवासी, चंदा आदिवासी, ग्याप्रसाद कोंदर, लक्ष्मण कोंदर, बाबूलाल आदिवासी, हरि आदिवासी और तोरण सिंह आदिवासी सहित कई महिला और पुरुष शामिल हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह क्रम जारी रहेगा.





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