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Karwa Chauth 2026 Moonrise Time LIVE: दिल्ली-NCR समेत पटना, जयपुर, मुंबई और बाकी जगहों पर कब निकलेगा करवा चौथ का चांद? जानिए अपने शहर की टाइमिंग | Karwa Chauth 2026 Moonrise Time LIVE Updates karwa Chauth ka chand kitne baje niklega Noida delhi up lucknow patna bihar Jaipur



पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि करवा चौथ का व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है.

उन्होंने बताया कि व्रत का शुभारंभ सुबह सरगी खाकर किया जाता है. सुबह तारों की छांव में यानी सूर्योदय से पहले, जब तक तारे आकाश में दिखाई देते हैं, तब तक सरगी खा ली जाती है और व्रत का संकल्प लिया जाता है. दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद व्रत का पारण रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है. चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं.

पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है. जो महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, उन्हें इस दिन कटिंग और सिलाई जैसे कामों से बचना चाहिए. चाकू, कैंची और सुई-धागे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. साथ ही, जब तक व्रत पूरा न हो जाए, तब तक नदी पार करने से भी बचना चाहिए.

शिप्रा सचदेव के अनुसार, करवा चौथ की पूजा विशेष रूप से प्रदोष काल में की जाती है. इस दौरान माता गौरी की पूजा का विशेष महत्व होता है. पूजा के लिए माता गौरी के स्वरूप को स्थापित किया जाता है.

उन्होंने बताया कि कई जगहों पर दस सुहागन महिलाएं एक साथ मिलकर करवा माता की कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं, जो बेहद शुभ माना जाता है. चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रत का समापन होता है.

करवा चौथ पर बायना निकालने की परंपरा का भी विशेष महत्व है. पंडित शिप्रा ने बताया कि बायना का मतलब होता है घुमाना. एक थाली में मटकी, फल, मेवा और अन्य सामग्री रखकर उसे घुमाया जाता है. यह बायना घर की सास या किसी अन्य बुजुर्ग सुहागन महिला को दिया जाता है. इसका स्वयं सेवन नहीं किया जाता.



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