
Jitiya Vrat 2026: जितिया पर सुबह स्नान और व्रत का संकल्प लिया जाता है, लेकिन जीमूतवाहन की मुख्य पूजा शाम को होती है. इसकी वजह आश्विन कृष्ण अष्टमी के साथ जुड़ा प्रदोष काल का नियम है. इस साल यानी 2026 में इसी आधार पर 3 अक्टूबर को जितिया व्रत रखा जाएगा.
जितिया की तारीख देखते समय अक्सर लोग पंचांग में सिर्फ अष्टमी खोजते हैं. अष्टमी दो तारीखों में दिखाई दे, तो सवाल उठता है कि व्रत पहले दिन रखें या अगले दिन? इस बार भी अष्टमी 3 अक्टूबर को शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह समाप्त हो रही है.
लेकिन जितिया के निर्णय में यह देखना जरूरी है कि प्रदोष काल में अष्टमी किस दिन मिल रही है. केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर व्रत का दिन तय करने से भ्रम हो सकता है.
प्रदोष में अष्टमी होने का क्या अर्थ है?
प्रदोष सूर्यास्त के आसपास का संध्या काल है. जब इस समय अष्टमी तिथि मौजूद हो, तो उसे प्रदोष व्यापिनी अष्टमी कहा जाता है. जीवित्पुत्रिका व्रत की प्रचलित पूजा-परंपरा में इसी समय जीमूतवाहन का पूजन और व्रत-कथा का श्रवण किया जाता है.
यहां प्रदोष काल को प्रदोष व्रत समझने की भूल भी नहीं करनी चाहिए. प्रदोष व्रत त्रयोदशी से जुड़ा है, जबकि जितिया आश्विन कृष्ण अष्टमी का व्रत है. जितिया में प्रदोष शब्द पूजा के संध्या समय के लिए आया है.
सुबह की पूजा क्या गलत है?
सुबह स्नान, संकल्प और अपनी नियमित पूजा करना गलत नहीं है. फर्क मुख्य व्रत-पूजन के समय का है. जितिया की परंपरा में दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को जीमूतवाहन की पूजा की जाती है. इसलिए सुबह की सामान्य पूजा और शाम के जितिया पूजन को एक ही बात नहीं मानना चाहिए.
जीमूतवाहन की प्रचलित कथा में एक मां के पुत्र शंखचूड़ को बचाने के लिए वे स्वयं गरुड़ के सामने अपना जीवन देने को तैयार हो जाते हैं. संतान की रक्षा के लिए किए गए उनके इस त्याग से जितिया की पूजा जुड़ी है.
हालांकि कथा के प्रसंग से कोई अलग खगोलीय कारण निकालकर यह कहना सही नहीं होगा कि शाम की पूजा से कोई निश्चित परिणाम मिलता है. प्रदोष में पूजन धार्मिक विधान और परंपरा का विषय है.
2026 में 3 अक्टूबर को ही व्रत क्यों?
पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण अष्टमी 3 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 7:59 बजे शुरू होकर 4 अक्टूबर को सुबह लगभग 5:51 बजे समाप्त होगी. इस तरह 3 अक्टूबर की शाम अष्टमी मौजूद रहेगी. अगले दिन शाम तक यह तिथि समाप्त हो चुकी होगी. प्रदोष व्यापिनी अष्टमी के आधार पर जितिया का व्रत और मुख्य पूजन शनिवार, 3 अक्टूबर को किया जाएगा.
शाम को पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं?
जितिया का शाम का पूजन और पारण अलग हैं. कथा सुनने या आरती करने के बाद उसी रात व्रत नहीं खोला जाता. प्रचलित विधान में अगले दिन अष्टमी समाप्त होने के बाद पारण किया जाता है. इस वर्ष पारण 4 अक्टूबर की सुबह होगा, उसका समय अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा से मिलाना चाहिए.
जितिया की तैयारी करते समय तीन बातें अलग-अलग देखें कि व्रत का दिन, संध्या में मुख्य पूजा और अगले दिन पारण. इन्हें एक ही मुहूर्त मान लेने से ही तारीख और समय की अधिकांश उलझन पैदा होती है.
FAQ
जितिया व्रत 2026 में कब है?
प्रदोष व्यापिनी अष्टमी के आधार पर जितिया व्रत शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. मुख्य पूजा शाम को और पारण अगले दिन होगा.
जितिया की पूजा शाम को क्यों होती है?
जीवित्पुत्रिका व्रत की प्रचलित परंपरा में प्रदोष काल में जीमूतवाहन का पूजन और कथा सुनने का विधान है. इसलिए मुख्य पूजा शाम को होती है.
प्रदोष व्यापिनी अष्टमी क्या है?
जिस दिन सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल में अष्टमी तिथि मौजूद रहती है, उसे प्रदोष व्यापिनी अष्टमी कहते हैं.
क्या जितिया में सुबह पूजा कर सकते हैं?
सुबह स्नान, संकल्प और नियमित पूजा कर सकते हैं. जितिया का मुख्य जीमूतवाहन पूजन प्रचलित परंपरा के अनुसार शाम को किया जाता है.
क्या शाम की पूजा के बाद जितिया का व्रत खोल सकते हैं?
शाम की पूजा के बाद पारण नहीं होता. पारण अगले दिन अष्टमी समाप्त होने के बाद किया जाता है. स्थानीय पंचांग से समय मिलाएं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
