
हिमाचल प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच भरमौर से भारतीय जनता पार्टी विधायक डॉ. जनक राज गुरुवार को विजिलेंस कार्यालय पहुंचे. सुबह करीब 11 बजे कार्यालय पहुंचे डॉ. जनक राज से करीब चार घंटे तक पूछताछ हुई. वह पूर्व भाजपा सरकार के दौरान मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पद पर रह चुके हैं.
पूछताछ के बाद डॉ. जनक राज ने सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनका हिमकेयर योजना में किसी तरह की गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि वह सही है तो पूरे मामले की जांच किसी सिटिंग जज से करवाई जानी चाहिए.
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गड़बड़ी के आरोपों से विधायक का इनकार
डॉ. जनक राज ने कहा कि हिमकेयर योजना गरीब लोगों के लिए लाई गई थी और इसका लाभ जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर लोगों को मिला है. उन्होंने कहा कि उनके मेडिकल सुपरिंटेंडेंट रहते करीब 95 करोड़ रुपये के बिल पास किए गए, लेकिन उनके कार्यकाल में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं.
विधायक ने राज्य सरकार पर उठाए सवाल
नादौन में कैंप लगाने से रोके जाने को लेकर भी डॉ. जनक राज ने सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लोग खुद मदद के लिए उन्हें फोन करते हैं. अगर लोगों की मदद करना कानून तोड़ना है तो वह ऐसे कानून तोड़ते रहेंगे. उन्होंने कहा कि लोगों की मदद करना उनका उद्देश्य है और वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हिमकेयर योजना में करीब 110 करोड़ से 150 करोड़ रुपये के बीच का एक बड़ा कथित वित्तीय घोटाला सामने आया है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Vigilance) की एक 8 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जो अस्पतालों द्वारा किए गए फर्जी क्लेम और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है.
आपको बता दें कि हिमकेयर योजना (HIMCARE Yojana) हिमाचल प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बीमा योजना है, यह योजना आयुष्मान भारत योजना से छूटे हुए परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज देती है.
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