खबर

H 1B वीजा को लेकर ट्रंप सरकार का हंटर; टेक कंपनियों Infosys-Wipro के शेयर पर असर, Microsoft ने दी सफाई | trump administration suspended microsoft infosys wipro from perm program US H 1B Visa crackdown it companies share market Green Card


वाशिंगटन:

अमेरिकी श्रम विभाग ने इमीग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एडॉबी (Adobe), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), एचसीएल (HCL), टीसीएस (TCS), Cognizant और Capgemini जैसी प्रमुख कंपनियों को PERM (Permanent Labour Certification Program) से निलंबित कर दिया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच चल रही है. इस बीच Microsoft ने अपने बचाव में कहा कि अमेरिका में उसके अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी नागरिक हैं और पिछले वर्ष दायर H-1B आवेदनों में से अधिकांश मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने के लिए थे. इस कदम से आईटी उद्योग और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

शेयर बाजार में दिखा असर

NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की घोषणा के बाद अमेरिकी बाजार में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर पर दबाव देखने को मिला. विप्रो के एडीआर में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इंफोसिस और कॉग्निजेंट के शेयर भी कमजोर रहे. तकनीकी शेयरों में बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया. विप्रो के ADRs 2.4 प्रतिशत गिरकर 1.63 डॉलर पर पहुंच गए, जबकि इंफोसिस के ADRs 3.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10.14 डॉलर पर कारोबार कर रहे थे. वहीं कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई और इसका शेयर 3.08 प्रतिशत गिरकर 54.70 डॉलर पर आ गया.

माइक्रोसॉफ्ट का रिस्पॉन्स

माइक्रोसॉफ्ट का रिस्पॉन्स
Photo Credit: माइक्रोसॉफ्ट ब्लॉग का स्क्रीनशॉट

माइक्रोसॉफ्ट का जवाब आया सामने

ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उसे अमेरिकी कार्यबल की क्षमता और प्रतिभा पर पूरा भरोसा है.

कंपनी ने कहा, ‘हम अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा में विश्वास करते हैं. यही कारण है कि अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी हैं.’

माइक्रोसॉफ्ट ने यह भी कहा कि वह प्रशासन को अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है. कंपनी के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में दायर लगभग 6,000 H-1B वीजा आवेदनों में से करीब 80 प्रतिशत आवेदन नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए नहीं बल्कि पहले से कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने के लिए थे. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी H-1B आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में मौजूद थे और बाद में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े.

वेतन को लेकर भी दी सफाई

माइक्रोसॉफ्ट ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन देकर नौकरी पर रखा जाता है. कंपनी ने कहा कि वह टेक्नोलॉजी सेक्टर में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी वेतन देने वाली कंपनियों में शामिल है. H-1B कर्मचारियों को भी वही वेतन दिया जाता है जो समान कार्य करने वाले अन्य कर्मचारियों को मिलता है. कंपनी ने कहा कि उसका उद्देश्य दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी कार्यशक्ति तैयार करना है, जिसके लिए अमेरिकी प्रतिभाओं को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को भी आकर्षित किया जाता है.

टीसीएस का जवाब

टीसीएस का जवाब
Photo Credit: टीसीएस द्वारा जारी किए गए पत्र की कॉपी

TCS का जवाब- हमारी रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती पर आधारित

आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग की जांच के आधार पर अमेरिकी सरकार द्वारा उसे और अन्य आईटी कंपनियों को कार्यक्रम से बाहर किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. शुक्रवार को जारी एक बयान में TCS ने कहा: ‘हमने अमेरिका सरकार द्वारा पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) को लेकर की गई घोषणा पर ध्यान दिया है और TCS श्रम विभाग (Department of Labour) के किसी भी निर्देश का पालन करेगी. अमेरिका में हमारी वर्कफोर्स रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती पर आधारित है, जिसे मजबूत कैंपस भर्ती मॉडल का सपोर्ट प्राप्त है. हमने पूरे देश में 31 कार्यालयों और डिलीवरी केंद्रों के माध्यम से एक बड़ा स्थानीय वर्कफोर्स तैयार किया है.’

कंपनी ने आगे कहा ‘जैसा कि हमने पहले भी घोषणा की थी, हम अगले पांच वर्षों में अमेरिका में अतिरिक्त 15,000 लोगों की भर्ती करने की उम्मीद रखते हैं, ताकि अपने स्थानीय कार्यबल को और मजबूत बनाया जा सके. पिछले दो वर्षों में हमारे PERM आवेदन एकल अंक (Single Digits) में रहे हैं, इसलिए हमें नहीं लगता कि इस कार्यक्रम के निलंबन का हमारी कार्यबल रणनीति या ग्राहकों के साथ जुड़ाव पर कोई प्रभाव पड़ेगा.’

वहीं, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (Nasscom) ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आव्रजन (Immigration) और कुशल प्रतिभाओं की वैश्विक आवाजाही (Skilled Talent Mobility) दो अलग-अलग विषय हैं और इन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

NASSCOM का जवाब

NASSCOM का जवाब
Photo Credit: नैस्कॉम द्वारा जारी बयान का स्क्रीनशॉट

नैसकॉम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी श्रम विभाग का यह फैसला आव्रजन की एक विशेष प्रक्रिया को प्रभावित करता है. साथ ही, भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता काफी कम की है, स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाई है और अमेरिका में एक मजबूत घरेलू कार्यबल विकसित किया है.
 

ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम

अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने गुरुवार को घोषणा की कि कई बड़ी तकनीकी और आईटी कंपनियों को पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित किया जा रहा है. इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा समूह की आईटी इकाइयां, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी कंपनियां शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों के खिलाफ विभिन्न फेडरल जांच चल रही हैं और इसी वजह से नई PERM आवेदन प्रक्रिया और लंबित मामलों की प्रोसेसिंग रोक दी गई है.

जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर साधा निशाना

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी वीजा लाभ लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले वर्ष 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसी समय कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं का लाभ मिला. वेंस ने इसे लंबे समय से चली आ रही एक विवादास्पद व्यवस्था करार देते हुए कहा कि प्रशासन ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कदम उठा रहा है.

अटॉर्नी जनरल का सख्त संदेश

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांच ने कहा कि यह कार्रवाई पूरे देश के नियोक्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश है कि अमेरिकी कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रशासन अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दे रहा है.

PERM क्या है?

PERM अमेरिका की रोजगार आधारित इमीग्रेशन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां योग्य विदेशी कर्मचारियों के लिए लेबर सर्टिफिकेशन प्राप्त करती हैं, जो बाद में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का आधार बनता है.

नई कार्रवाई से पहले से स्वीकृत मामलों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए आवेदन और लंबित मामलों की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है. हालांकि H-1B वीजा कार्यक्रम अलग व्यवस्था के तहत चलता है और इस निर्णय से उस पर सीधा असर नहीं पड़ता.

यदि PERM प्रोसेसिंग लंबे समय तक निलंबित रहती है तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका में कार्यबल प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल और अन्य भारतीय कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है. ऐसे में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी कर्मचारियों की दीर्घकालिक योजना, भर्ती और प्रतिभा बनाए रखने की रणनीति को प्रभावित कर सकती है.

विश्वविद्यालयों पर भी जांच

इमीग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर सख्ती के बीच अमेरिकी श्रम विभाग ने J-1 वीजा से जुड़े कथित दुरुपयोग की जांच भी शुरू की है. इस जांच के दायरे में हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, एमआईटी सहित नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है. प्रशासन का आरोप है कि कुछ कार्यक्रमों के जरिए अमेरिकी शोधार्थियों और छात्रों के वेतन पर दबाव डाला जा रहा है.

यह भी पढ़ें : ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला; विप्रो, टाटा, इन्फोसिस जैसी IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button