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Explainer: ग्रीन कार्ड पर नई नीति को लेकर अमेरिका में सियासी घमासान, भारतीयों पर क्या पड़ सकता है असर? | Explainer- Political uproar in US over the Trump administration new Green Card policy, how it can impact Indians?


अमेरिका में ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) पाने की प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के कई डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार से उनकी नई आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की है. डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि अगर यह नीति लागू रही तो हजारों-लाखों ऐसे लोग, जो अभी अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, उन्हें अपना आवेदन पूरा करने के लिए अमेरिका छोड़कर अपने देश या किसी दूसरे देश में स्थित अमेरिकी दूतावास जाना पड़ सकता है.

दरअसल, अमेरिका की ट्रंप सरकार ने ग्रीन कार्ड से जुड़ी एक नई नीति बनाई है, जिसके अनुसार अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड पाना अब सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाएगा. इसके तहत अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे कई मामलों में आवेदकों को अमेरिका छोड़कर अपने देश जाकर अमेरिकी दूतावास के जरिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने के लिए कह सकते हैं. 

इसमें कहा गया कि एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस यानी अमेरिका के भीतर रहकर ग्रीन कार्ड प्राप्त करना कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि असाधारण राहत यानी एक्स्ट्राऑडिनरी फॉर्म ऑफ रिलीफ है.

यहीं से विवाद शुरू हुआ. डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि यह बदलाव अमेरिकी कानून और दशकों से चली आ रही व्यवस्था के खिलाफ है.

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आखिर एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस होता क्या है?

आमतौर पर ग्रीन कार्ड पाने के दो तरीके होते हैं. पहला, अगर कोई व्यक्ति पहले से अमेरिका में वैध रूप से रह रहा है, तो वह वहीं रहते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है. इसे एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस कहते हैं. दूसरा, अगर व्यक्ति अमेरिका के बाहर है तो उसे अमेरिकी दूतावास या कांसुलेट में जाकर कांसुलर प्रक्रिया के जरिए आव्रजन वीजा लेना पड़ता है. अब विवाद इस बात पर है कि नई नीति कहीं पहले वाले आसान रास्ते को सीमित तो नहीं कर रही.

डेमोक्रेट सांसदों ने क्या कहा?

सीनेटर एलेक्स पडिल्ला, डिक डर्बिन, जेमी रस्किन और प्रमिला जयपाल समेत कई अन्य सांसदों ने आव्रजन सेवा के निदेशक जोसेफ एड्लो को लिखित रूप में विरोध जताया.

उन्होंने कहा कि, “अमेरिकी कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि विदेश जाकर आवेदन करना ज्यादा बेहतर या प्राथमिक तरीका है. कांग्रेस ने वर्षों पहले जानबूझकर यह व्यवस्था बनाई थी ताकि योग्य लोग अमेरिका छोड़े बिना ही ग्रीन कार्ड ले सकें. ऐसे में नई नीति कानून की मंशा के बिल्कुल विपरीत है.”

सांसदों ने आरोप लगाया कि आव्रजन सेवा अपनी आंतरिक नीति के जरिए ऐसे नियम बना रहा है जिसे बनाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है.

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नया विवाद किस बात पर है?

डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि नई नीति के तहत अधिकारियों को यह देखने का अधिकार दिया जा सकता है कि क्या आवेदक का अमेरिका में रहना राष्ट्रीय हित में है? क्या उससे आर्थिक लाभ होगा?

डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि अमेरिकी इमिग्रेशन कानून में पहले से ऐसी कोई शर्त मौजूद ही नहीं है. यानी सांसदों के मुताबिक आव्रजन सेवा ने अपने स्तर पर एक नया मानदंड जोड़ दिया है.

इससे किसे नुकसान हो सकता है?

अगर बड़ी संख्या में लोगों को विदेश जाकर आवेदन करना पड़ा तो कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं. 

इससे पति-पत्नी और बच्चों से महीनों तक अलग रहना. विदेश स्थित अमेरिकी दूतावासों में पहले से लंबी वीजा वेटिंग होने के कारण आवेदन में भारी देरी होना.

अमेरिका में काम कर रही कंपनियों को अपने विदेशी कर्मचारियों को खोने का खतरा पैदा होगा. तो अमेरिकी कंपनियों के लिए टैलेंट बनाए रखना मुश्किल होगा.

वहीं पेशेवरों के नजरिए से देखें तो डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, स्टार्टअप उद्यमी और अन्य कुशल कर्मचारियों पर इसका असर पड़ सकता है.

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United States Parliament

अमेरिकी कांग्रेस (संसद)
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कांग्रेस ने कानून बनाते समय क्या सोचा था?

डेमोक्रेट सांसदों ने अपने पत्र में याद दिलाया कि 1952 के इमिग्रेशन ऐंड नेशनलिटी एक्ट के तहत एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस की व्यवस्था बनाई गई थी. बाद में इसमें बदलाव इसलिए किए गए क्योंकि बड़ी संख्या में योग्य अप्रवासी पहले से अमेरिका में रह रहे थे. कांग्रेस चाहती थी कि ऐसे लोग बिना देश छोड़े ही अपनी स्थायी निवास प्रक्रिया पूरी कर सकें.

डेमोक्रेट्स ने आव्रजन सेवा से पूछे 9 सवाल

डेमोक्रेट सांसदों ने आव्रजन सेवा से कई अहम सवाल पूछे हैं. उन्होंने जानना चाहा है कि नई नीति कब से लागू होगी? किन लोगों पर इसका असर पड़ेगा? राष्ट्रीय हित और आर्थिक लाभ का मतलब क्या होगा? जो आवेदन पहले से लंबित हैं उनका क्या होगा? क्या अधिकारियों को इस संबंध में कोई विशेष प्रशिक्षण दिया गया है? और क्या इस फैसले से पहले विदेश मंत्रालय से सलाह ली गई थी?

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US Department of Homeland Security

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम को चलाने में मुख्य भूमिका होती है
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ट्रंप प्रशासन का क्या तर्क है?

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कानूनी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं को पहले की तुलना में अधिक सख्ती और अधिक प्रशासनिक विवेक के साथ लागू किया जाना चाहिए. प्रशासन का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हर ग्रीन कार्ड देने के लिए हर आवेदक के लिए प्रमाण की जरूरत नहीं होगी. ऐसे में यह अधिकारियों के विवेकाधिकार पर होना चाहिए कि हर मामले की जरूरत के मुताबिक फैसला करें.

फिलहाल यह नीति राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बनी हुई है.

यदि आव्रजन सेवा इस नीति को वापस नहीं लेता, तो इसके खिलाफ अदालत में चुनौती दी जा सकती है. वहीं कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर दबाव बढ़ सकता है.

अमेरिका में रह रहे भारतीयों की फाइल फोटो

अमेरिका में रह रहे भारतीयों की फाइल फोटो
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भारतीयों पर क्या पड़ सकता है असर?

अगर यह नीति सख्ती से लागू होती है, तो इसका असर सबसे ज्यादा उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो परिवार, नौकरी या अन्य कानूनी आधारों पर अमेरिका में रहते हुए हमेशा-हमेशा के लिए वहीं बसने यानी ग्रीन कार्ड पाने की वर्षों से उम्मीद लगाए बैठे हैं. 

बड़ी संख्या में भारतीय आईटी पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, शोधकर्ता और अन्य कुशल भारतीय पहले से ही अमेरिका में रहकर काम कर रहे हैं और वहीं से एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटट यानी अमेरिका में रहकर ही ग्रीन कार्ड पाने की कानूनी प्रक्रिया के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं. 

अगर ऐसे लोगों को आवेदन के लिए भारत या किसी अन्य देश में स्थित अमेरिकी दूतावास जाना पड़ा, तो उन्हें वीजा अपॉइंटमेंट की वेटिंग टाइम, नौकरी में रुकावट और परिवार से अलग रहने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह नीति किन-किन श्रेणियों के आवेदकों पर लागू होगी, इसलिए भारतीयों पर इसका वास्तविक प्रभाव आव्रजन सेवा की अंतिम व्याख्या और लागू करने के तरीके पर निर्भर करेगा.

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