
बर्लिन:
जर्मनी में भारतीय राजदूत अजीत विनायक गुप्ते ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की जर्मन और भारतीय CEO तथा व्यापारिक नेताओं के साथ हुई मुलाकात को लेकर NDTV से बातचीत की. उन्होंने यूरोपीय संघ के भीतर भारतीयों के लिए जर्मनी के सबसे बड़े डेस्टिनेशन के रूप में उभरने पर चर्चा की. भारतीय राजदूत ने कहा कि पिछले 2 साल में जर्मन कंपनियों ने भारत में 7.5 बिलियन डॉलर्स का इन्वेस्टमेंट करने की घोषणा की है.
अजीत विनायक गुप्ते ने कहा कि भारतीय आंकड़े के मुताबिक जर्मन कंपनियों ने भारत पर अभी तक 15 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया है, जबकि जर्मन आंकड़े के मुताबिक जर्मन कंपनियां भारतीय बाजार में 28 बिलियन डॉलर तक निवेश कर चुकी है. भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है. मिडिल क्लास बढ़ रहा है, कंज्यूमर मार्केट भी बड़ा हो रहा है. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने से दोनों देशों में निवेश की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी.

भारतीय राजदूत ने बताया कि जर्मन विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले भारतीय प्रवासियों और छात्रों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. जर्मनी में भारतीय प्रवासी की संख्या बढ़कर 3,32 000 पहुंच गई है. इसके अलावा 70,000 भारतीय नागरिकों ने जर्मन नागरिकता ली है. पिछले 2 साल में ही 60,000 से ज्यादा भारतीय जर्मनी आए हैं.
उन्होंने कहा कि 2014 में जर्मनी में भारतीय नागरिकों की संख्या 50,000 थी. आज यह संख्या करीब 4 लाख तक पहुंच चुकी है. 6 साल पहले जर्मनी में 25,000 भारतीय स्टूडेंट पढ़ते थे. 2024 में संख्या बढ़कर 50,000 हुई और इस साल यह 70,000 तक पहुंच गई है.
जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस हर सेमेस्टर में सिर्फ 750 यूरो है, यानी साल में सिर्फ 1500 यूरो है. इसलिए भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी में पढ़ाई करना अफॉर्डेबल हो रहा है.
इसे भी पढ़ें: ‘11 साल से फूटी कौड़ी नहीं दी’, पीयूष गोयल ने जर्मनी में खोला पश्चिम के पापों का बही खाता





