धर्म

Valmiki Jayanti 2026: वाल्मीकि जयंती कल, पूर्णिमा में पूजा के लिए सुबह कितने बजे तक मिलेगा समय?


शरद पूर्णिमा आज 25 अक्टूबर को है, लेकिन वाल्मीकि जयंती कल, सोमवार 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी. दोनों पर्व आश्विन पूर्णिमा से जुड़े हैं, इसलिए तारीख को लेकर उलझन हो सकती है. पंचांग के अनुसार पूर्णिमा आज दोपहर शुरू होकर कल सुबह तक रहेगी. वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर को दर्ज है. भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर भी यही तारीख दी गई है. 

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है. उनकी जयंती पर मंदिरों में पूजा, रामायण पाठ और शोभायात्राओं का आयोजन होता है. घर में पूजा करने वाले श्रद्धालु कल सुबह पूर्णिमा तिथि रहते आराधना कर सकते हैं.

पूर्णिमा तिथि कब तक रहेगी?

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार आश्विन पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. सोमवार को सूर्योदय के समय पूर्णिमा रहेगी. इसी दिन महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई जाएगी. 

वाल्मीकि जयंती पर पूजा का समय

नई दिल्ली में 26 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6:29 बजे होगा. जो श्रद्धालु पूर्णिमा तिथि में पूजा करना चाहते हैं, वे सुबह 6:29 से 9:41 बजे के बीच पूजा और पाठ कर सकते हैं. ये समय भारतीय मानक समय में हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय का समय अलग होगा. 

ध्यान रखें, यह पूर्णिमा तिथि में पूजा करने की अवधि है, कोई अलग से निर्धारित विशेष मुहूर्त नहीं. सुबह 9:41 बजे के बाद भी जयंती के कार्यक्रम, मंदिर दर्शन और रामायण पाठ किए जा सकते हैं. मंदिर में होने वाली सामूहिक पूजा में शामिल होना हो तो वहां का समय पहले पता कर लें.

घर में कैसे करें पूजा?

सुबह स्नान के बाद पूजा की जगह साफ करें. चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर महर्षि वाल्मीकि का चित्र रखें. रामायण की पुस्तक भी आदरपूर्वक पास रख सकते हैं.

दीपक और धूप जलाएं. महर्षि को फूल अर्पित करें और फल या मिठाई का प्रसाद रखें. इसके बाद रामायण का पाठ करें. घर में जो पूजा पद्धति चली आ रही है, उसी के अनुसार आराधना करें. पूजा के अंत में प्रणाम करके प्रसाद बांट दें.

संस्कृत पढ़ने में कठिनाई हो तो रामायण का हिंदी अनुवाद पढ़ सकते हैं. बच्चों को भी साथ बैठाकर कथा सुनाएं और उनके सवालों के जवाब दें.

रामायण का कौन-सा प्रसंग पढ़ें?

महर्षि वाल्मीकि के बारे में जानने के लिए बालकांड के शुरुआती सर्ग पढ़े जा सकते हैं. इनमें नारद से उनका संवाद, क्रौंच पक्षी की मृत्यु से उपजा शोक और पहले श्लोक की रचना का प्रसंग मिलता है. यह कथा बताती है कि दूसरे के दुख से व्यथित हुए ऋषि के मन में काव्य ने कैसे आकार लिया. 

जयंती पर पूजा के अलावा जरूरतमंद बच्चों को किताबें और पढ़ाई की सामग्री दी जा सकती है. पुस्तक दान करें तो बच्चों की उम्र और जरूरत पूछकर किताबें चुनें, ताकि वे उनके काम आ सकें.

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