
हिमाचल प्रदेश में HRTC की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच तनातनी बढ़ गई है. एक तरफ चालक-परिचालक यूनियन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर अड़ी हुई है, तो दूसरी ओर सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जारी रखने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है. यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो रात 12 बजे के बाद प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं.
HRTC चालक-परिचालक यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय देनदारियों का भुगतान लंबे समय से लंबित है. यूनियन नेताओं का आरोप है कि कई बार सरकार और निगम प्रबंधन के सामने समस्याएं उठाई गईं, लेकिन उनका समाधान नहीं किया गया.
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यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के पास आंदोलन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. उनका दावा है कि सरकार अस्थायी कर्मचारियों के सहारे परिवहन व्यवस्था चलाने की बात कर रही है, लेकिन प्रशिक्षित और अनुभवी चालक-परिचालकों की कमी को इतनी आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता.
पेंशनर्स ने भी दिया आंदोलन को समर्थन
हड़ताल के मुद्दे पर HRTC पेंशनर्स भी कर्मचारियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. पेंशनर्स ने यूनियन के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि उन्हें भी समय पर पेंशन नहीं मिल रही है और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
पेंशनर्स का आरोप है कि सरकार की ओर से किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है. ऐसे में कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
सरकार का सख्त रुख, ESMA लागू
हड़ताल की चेतावनी के बीच उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन बस सेवाओं को बाधित करना कानून के खिलाफ है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले से ESMA लागू है और अगर कोई कर्मचारी कानून का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. सरकार का लक्ष्य आम जनता को किसी तरह की परेशानी से बचाना है.
मुकेश अग्निहोत्री ने यूनियन को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि यदि चालक और परिचालक बसें नहीं चलाना चाहते तो वे बसों की चाबियां निगम प्रबंधन को सौंप दें.
उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने या कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने बताया कि गुरुवार से चालक और परिचालकों को उनके रूट संबंधी लिखित आदेश जारी किए जाएंगे.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार HRTC को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि निगम के लिए 813 नई बसें खरीदी गई हैं, जिनमें 279 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं.
इसके अलावा 2,198 कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित किया गया है, 327 परिचालकों की नियमित भर्ती की गई है और 198 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की ओर से वित्तीय मांगों पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी और मुख्य मुद्दा तबादलों का था.
आपात स्थिति से निपटने की तैयारी
संभावित हड़ताल को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार कर ली है. प्रदेश के 31 डिपो में 656 चालक और परिचालकों की 6 महीने के लिए आपातकालीन आधार पर भर्ती की जाएगी. इन कर्मचारियों को 1500 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जाएगी ताकि बस सेवाएं पूरी तरह ठप न हों.
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अब पूरे प्रदेश की नजरें सरकार और यूनियन के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं. अगर देर रात तक कोई समाधान नहीं निकलता है तो हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि प्रदेश में HRTC की बसें सामान्य रूप से चलेंगी या फिर हड़ताल का असर आम लोगों की यात्रा पर पड़ेगा.