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DSP के प्रमोशन के दावे को सम्राट के मंत्री ने क्यों नकारा? भरत तिवारी एनकाउंटर पर CM को देंगे विस्तृत जानकारी | Bharat Tiwari Encounter Case Bihar minister meets Ashok Choudhary family of Bhojpur man killed in encounter


बिहार में भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. रविवार को बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी पीड़ित परिवार से मिलने उनके आवास पहुंचे. उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और न्याय दिलाने का भरोसा दिया. मंत्री के दौरे को लेकर इलाके में दिनभर चर्चाओं का माहौल रहा. इस बीच भरत तिवारी एनकाउंटर में मामले में बड़ी बात सामने आई है. परिजनों का दावा किया है कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां देर रात उनके घर के आसपास नज़र रखती रही हैं. उधर भरत तिवारी मां ने 09 जुलाई से आमरण अनशन करने की घोषणा की है. 

जांच में दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने रविवार को भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि उन्हें मामले के कई ऐसे पहलुओं के बारे में पता चला है जिनके बारे में उन्हें पहले जानकारी नहीं थी और वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इन घटनाक्रमों से अवगत कराएंगे. साथ ही मंत्री अशोक चौधरी ने साफ किया कि जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम का नेतृत्व करने वाले DSP को प्रमोशन देकर पुरस्कृत किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए चौधरी ने कहा कि अधिकारी का तबादला केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए किया गया था. 

हाल में बिहार सरकार ने 12 IAS अफसरों के तबादले के साथ 53 DSP स्तर के पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर किया था, जिसमें शाहपुर में SDPO रहे राजेश कुमार शर्मा का मद्य निषेध विभाग में तबादला हुआ. भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राजेश शर्मा के खिलाफ भी FIR दर्ज है. मद्य निषेध विभाग में उनकी पोस्टिंग के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े कर दिए.

DSP के प्रमोशन को मंत्री अशोक ने नकारा

उन्होंने कहा, “यह गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है कि DSP को प्रमोशन दिया गया है. कोई प्रमोशन नहीं दिया गया है. उनका तबादला केवल इसलिए किया गया है ताकि जांच प्रभावित न हो.” मंत्री ने कहा कि सरकार ने खुद अधिकारी के कामकाज को लेकर जनता की नाराज़गी को स्वीकार किया था, जिसके कारण उनका तबादला किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) की भूमिका की भी जांच की जा रही है. मंत्री अशोक चौधरी ने आगे कहा कि जब मुठभेड़ हुई, तो उस इलाके के SDM मौके पर क्या कर रहे थे? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. 

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ग्रामीणों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग

वहीं, भरत तिवारी की बहन रूबी देवी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 14 “बेगुनाह” ग्रामीणों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए हैं और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. उन्होंने इन मामलों की समीक्षा करने और बेगुनाह लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की. न्याय न मिलने की स्थिति में गुरुवार (09 जुलाई) से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है. इसके अलावा परिवार ने यह भी दावा किया कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां देर रात उनके घर के आसपास नज़र रखती रही हैं.

बता दें कि पिछले कुछ दिनों में सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुके हैं. हर मुलाकात में निष्पक्ष जांच और न्याय का आश्वासन दिया गया, लेकिन परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें न्याय की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है. भरत तिवारी की मां आशा देवी का कहना है कि केवल आश्वासन से उनका भरोसा नहीं लौटेगा. वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. मां आशा देवी ने घोषणा की कि अगर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई तो गुरुवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगी. इस घोषणा के बाद प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है. 




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