
उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी जल्द ही समान नागरिक संहिता (UCC – Uniform Civil Code) कानून लागू करने वाले राज्यों की सूची में शुमार होने जा रहा है. राज्य में यूसीसी का फाइनल ड्राफ्ट पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है. रविवार को होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक में इस ड्राफ्ट को आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी.
इस ऐतिहासिक फैसले के लिए मोहन यादव सरकार ने राजधानी भोपाल के पास स्थित जगदीशपुर (Destinaton Cabinet Meeting) का चयन किया है. कैबिनेट की मुहर लगने के बाद 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र (20 से 24 जुलाई 2026) में इसे विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा.
‘ऐतिहासिक जगदीशपुर में होगा बड़ा फैसला’
आपको बता दें कि फरवरी 2026 में ही मोहन सरकार ने भोपाल के पास स्थित ‘इस्लाम नगर’ का नाम बदलकर उसका ऐतिहासिक नाम ‘जगदीशपुर’ किया था. अब यूसीसी जैसे बड़े और ऐतिहासिक फैसले के लिए इसी जगदीशपुर के ऐतिहासिक महल को कैबिनेट बैठक के लिए चुना गया है.
MP UCC ड्राफ्ट की 7 सबसे बड़ी सिफारिशें (सूत्रों के अनुसार):
मध्य प्रदेश के यूसीसी ड्राफ्ट में कई अहम और बड़े बदलाव किए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक इस ड्राफ्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- आदिवासी रहेंगे दायरे से बाहर: राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें.
- बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण रोक: नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में बिना कानूनी तलाक के एक से अधिक विवाह करने (बहुविवाह) पर पूरी तरह से पाबंदी होगी.
- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: ड्राफ्ट में पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत लाने का प्रस्ताव है. ऐसे जोड़ों के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा.
- बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक: उत्तराधिकार और पैतृक संपत्ति के मामले में अब लड़कियों (बेटियों) को भी बेटों के बराबर समान कानूनी अधिकार दिए जाएंगे.
- विवाह और तलाक के नियम होंगे समान: सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए शादी, तलाक और गुजारा भत्ता (Maintenance) से जुड़े पारिवारिक मामलों में एक समान नियम लागू होंगे.
- गोद लेने (Adoption) की पारदर्शी प्रक्रिया: बच्चा गोद लेने से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को भी सभी समुदायों के लिए पारदर्शी और एक समान बनाया गया है.
- बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ने पर एक्शन: ड्राफ्ट में बच्चों की संपत्ति में माता-पिता दोनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ने वाले बच्चों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के सुझाव शामिल हैं.
जस्टिस रंजना देसाई समिति ने तैयार किया है ड्राफ्ट
इस विस्तृत ड्राफ्ट को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया है. व्यापक अध्ययन के बाद इसे 3 वॉल्यूम (भागों) में बनाया गया है.
इस कानून को बनाने में जनता की राय का भी पूरा ख्याल रखा गया है. समिति को मध्य प्रदेश यूसीसी पोर्टल और जिला-स्तरीय बैठकों के माध्यम से जनता और विभिन्न संगठनों से 9.58 लाख से अधिक सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं, जिन्हें इस ड्राफ्ट में समाहित किया गया है.
यदि मानसून सत्र में यह विधेयक पारित हो जाता है, तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का एक और प्रमुख राज्य बन जाएगा.
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