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अमेरिका से जंग के बीच ईरान ने क्यों कहा- ‘मत चलाओ AC’? समझिए इस पाबंदी के पीछे का खतरनाक ‘War Science’ | How US Attacks On Iran Power Infrastructure Threaten National Stability Tehran Asked Public no use AC


तेहरान:

अमेरिका और ईरान के बीच जारी लड़ाई के बीच मध्य पूर्व में स्थिति फिर से तनाव भरी हो गई है. ईरान में हमले की वजह से 38 लोगों की मौत हो गई है. इस बीच ईरान ने देश के लोगों से अपील की है कि कोई एयर कंडीशनर का इस्तेमाल न करे. 

ये ऐसी अपील है जिसे सुनकर सबसे पहला सवाल मन में आता है कि आखिर ईरान ने ऐसा क्यों कहा. हालांकि ईरान को और से एयर कंडीशनर के साथ बिजली का भी सीमित इस्तेमाल करने की बात भी कही गई है. 

लेकिन आखिर युद्ध के मैदान में बम-बारूद बरसने और घर के अंदर एसी बंद करने का क्या कनेक्शन है? 

जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो सिर्फ सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाता, बल्कि देश की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले बुनियादी ढांचे को तबाह किया जाता है.

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अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ यही रणनीति अपनाई है और उसके सबसे महत्वपूर्ण बिजली घरों और पावर ग्रिड्स को निशाना बनाया है. इन जगहों से ही पूरे देश को बिजली सप्लाई होती है. इन अमेरिकी हमलों के कारण ईरान का पावर जनरेशन सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई बड़े बिजली घर ठप पड़ चुके हैं.

इस तबाही के कारण बचे हुए पावर ग्रिड्स पर लोड अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है. हम सभी जानते हैं कि एयर कंडीशनर चलाने में सबसे ज्यादा बिजली की खपत होती है. अगर ईरान के करोड़ों लोग इस संकट की घड़ी में भी धड़ल्ले से एसी चलाते रहेंगे, तो बचे-खुचे पावर ग्रिड भी भारी दबाव के कारण पूरी तरह फेल हो जाएंगे. यही वह वॉर साइंस है जिसके तहत दुश्मन देश के एनर्जी सिस्टम को घुटनों पर लाया जाता है और ईरान इसी सिस्टम को बचाने की जद्दोजहद में जुटा है.

अमेरिका ने ईरान के कई पावर ग्रिड पर हमला किया है.

अमेरिका ने ईरान के कई पावर ग्रिड पर हमला किया है.
Photo Credit: AFP

ईरान को सता रहा है ‘क्यूबा’ जैसा ब्लैकआउट होने का डर

ईरानी अधिकारियों और रणनीतिकारों को डर है कि अगर ग्रिड फेल हुआ, तो ईरान का हाल भी क्यूबा जैसा हो सकता है. हाल ही में क्यूबा ने एक ऐसा भयानक दौर देखा था जब उसका पूरा नेशनल ग्रिड फेल हो गया था और पूरा देश कई दिनों तक घने अंधेरे में डूब गया था.

युद्ध के समय अगर कोई देश पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है, क्योंकि बिना बिजली के फैक्ट्रियां, दफ्तर और जरूरी सेवाएं बंद हो जाती हैं जिससे देश कंगाल होने की कगार पर पहुंच जाता है.

इसके अलावा, युद्ध के समय सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए और मिलिट्री कमांड सेंटर्स को होती है. अगर आम लोग बिजली खत्म कर देंगे, तो सेना और डॉक्टरों के लिए जरूरी बैकअप नहीं बचेगा. इसके साथ ही, ग्रिड फेल होने से मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और सरकारी रडार सिस्टम भी बंद हो सकते हैं. इस हालात से बचने के लिए ईरान बिजली की राशनिंग कर रहा है. अगर बिजली ठप हुई तो ईरान को जंग और सप्लाई दो मोर्चों पर लड़ रहा होगा. 

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