

घर का मुख्य द्वार सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवेश द्वार भी माना गया है. वास्तु शास्त्र में ऐसी मान्यता है कि अगर मुख्य द्वार का रंग और दिशा वास्तु के अनुसार हो तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं गलत रंग आर्थिक परेशानियां और निगेटिव एनर्जी बढ़ा सकता है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने मुख्य द्वार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम बताए हैं.
दिशा के अनुसार चुनें मुख्य द्वार का रंग
पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, पूर्व दिशा के मुख्य द्वार के लिए हल्का नीला या सफेद रंग शुभ माना जाता है. पश्चिम दिशा में नीला और सफेद रंग सफलता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. उत्तर दिशा में हरा या हल्का नीला रंग धन लाभ और आर्थिक मजबूती का संकेत देता है. वहीं दक्षिण दिशा के लिए हल्का लाल या गुलाबी रंग शुभ माना गया है.
काले रंग से करें परहेज
वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार पर काला रंग लगाने से बचना चाहिए. इसे निगेटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है. साथ ही दरवाजे का रंग फीका या उखड़ा हुआ भी नहीं होना चाहिए. समय-समय पर पेंट करवाना शुभ माना जाता है.
मुख्य द्वार की सही दिशा भी जरूरी
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि घर का मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है. इन दिशाओं से पॉजिटिव एनर्जी का प्रवेश होता है और घर में सुख, शांति व आर्थिक समृद्धि बनी रहती है.
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