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सावन में कैसे शुरू करें सोलह सोमवार के व्रत? ज्योतिषाचार्य ने बताए जरूरी नियम | sawan solah somwar vrat rules and rituals significance know from astrologer


भगवान शिव को समर्पित सोलह सोमवार व्रत हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय और फलदायी व्रतों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. अगर इस व्रत की शुरुआत श्रावण महीने के पहले सोमवार से की जाए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. हालांकि, व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसके नियमों और विधि-विधान का पालन करना आवश्यक माना गया है. आज हम आपको सोलह सोमवार का व्रत शुरू करने के नियम बताने जा रहे हैं. इसकी जानकारी ज्योतिषाचार्य मदनमोहन ने NDTV से बातचीत के दौरान दी है.

सोलह सोमवार व्रत का संकल्प

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि श्रावण मास में सोलह सोमवार व्रत शुरू करने से पहले विधिपूर्वक संकल्प लें. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद भगवान शिव के समक्ष बैठकर हाथ में जल, अक्षत और बेलपत्र लेकर संकल्प करें कि आप श्रद्धा-भक्ति के साथ सोलह सोमवार का व्रत और पूजन पूर्ण करेंगे. शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत का संकल्प और उसकी नियमितता ही व्रत की सफलता का आधार होती है.

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सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि

संकल्प लेने के बाद हर सोमवार भगवान शिव का विधिवत पूजन करना चाहिए. पूजा के समय शिव परिवार के समक्ष घी के पांच दीपक जलाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जप करें. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प, जल, पंचामृत, रोली और अक्षत अर्पित करें. पूजा में बिल्व पत्र का विशेष महत्व बताया गया है. साथ ही मौसमी फलों के साथ घेवर का भोग भी लगाया जा सकता है, जिसे शिवजी का प्रिय प्रसाद माना जाता है.

ऐसे बांटें प्रसाद

पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद को तीन बराबर भागों में बांटना चाहिए. पहला भाग गाय को खिलाएं. दूसरा भाग परिवार के सदस्यों में बांट दें. इसके बाद तीसरा भाग व्रतधारी खुद ग्रहण करें. मान्यता है कि इस प्रकार प्रसाद वितरण करने से व्रत का पुण्य और अधिक बढ़ता है तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.

व्रत के दौरान इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

  • सोलह सोमवार व्रत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है.
  • व्रत अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करने का विशेष महत्व बताया गया है. इससे मन की शुद्धि और साधना में एकाग्रता बनी रहती है.
  • हर सोमवार एक ही समय पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें. नियमितता व्रत की शक्ति को बढ़ाने वाली मानी गई है.
  • व्रत के दिन फलाहार करें या सात्विक भोजन ग्रहण करें. कई श्रद्धालु नमक का पूर्ण त्याग भी करते हैं.
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श्रावण मास में सोलह सोमवार व्रत का महत्व

श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महीना माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन माह में भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं. इसलिए श्रावण के प्रथम सोमवार से सोलह सोमवार व्रत आरंभ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है. श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने वाले भक्तों को सुख, समृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है.

सोलह सोमवार व्रत की उद्यापन विधि

सोलह सोमवार पूरे होने के बाद अगले सोमवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है. शास्त्रीय मान्यता के अनुसार उद्यापन का कार्य प्रातःकाल से लेकर सुबह 11 बजे तक पूरा कर लेना चाहिए. इस दिन भगवान शिव का पुनः विधिवत पूजन करें. इसके बाद हवन, तर्पण, मार्जन और विसर्जन आदि धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न करें. हवन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपने अनुसार दक्षिणा और दान दें.

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