धर्म

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या कब है? जानें सोमवती-भौमवती संयोग का सही मुहूर्त और पूजा विधि


Ashadha Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में इस साल आषाढ़ मास की अमावस्या बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है. इस बार आषाढ़ अमावस्या पर एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो अमूमन देखने को नहीं मिलता. पंचांग के अनुसार, इस अमावस्या की शुरुआत सोमवार की शाम से हो रही है और समापन मंगलवार के दिन होगा. इस वजह से भक्तों को सोमवती अमावस्या (सोमवार का संयोग) और भौमवती अमावस्या (मंगलवार का संयोग) दोनों का फल एक साथ मिलेगा.

यह महासंयोग महादेव की आराधना, मंगल देव की कृपा पाने और कुंडली के गंभीर दोषों को जड़ से खत्म करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रही है. 

ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान किए गए कुछ खास उपायों से पितृ दोष, कालसर्प दोष और शनि जनित कष्टों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है.

आषाढ़ अमावस्या 2026: तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त 

अमावस्या तिथि की शुरुआत सोमवार की रात से ही हो जाएगी, जिससे यह शिव साधना के लिए महामुहूर्त बनाएगी. उदयातिथि के कारण मुख्य स्नान-दान 14 जुलाई को होगा.

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 06:50 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त: 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 03:14 बजे तक

स्नान-दान का श्रेष्ठ समय: 14 जुलाई, सुबह 04:30 बजे से सुबह 10:43 बजे तक

क्यों बेहद खास है सोमवती और भौमवती का यह महासंयोग?

आमतौर पर सोमवती और भौमवती अमावस्या अलग-अलग महीनों में पड़ती हैं, लेकिन इस बार तिथि की टाइमिंग के कारण दोनों का पुण्य लाभ उठाया जा सकेगा:

सोमवार की रात (13 जुलाई): महादेव दिलाएंगे गंभीर दोषों से मुक्ति
सोमवार की शाम से अमावस्या शुरू होने के कारण यह समय तंत्र-मंत्र की शांति और शिव आराधना के लिए अचूक है.

  • पितृ दोष: सोमवार की शाम शिव मंदिर में कच्चे दूध और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करने से पितृ दोष शांत होता है.
  • कालसर्प दोष: भगवान शिव नागों के स्वामी हैं. इस रात शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करना कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करता है.
  • कमजोर चंद्रमा: अमावस्या पर चंद्रमा अदृश्य रहता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है. शिव जी की पूजा से कुंडली का पीड़ित चंद्रमा मजबूत होता है.

मंगलवार की सुबह-दोपहर (14 जुलाई): भौमवती अमावस्या पर पितृकर्म
जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे ‘भौमवती अमावस्या’ कहा जाता है. यह दिन हनुमान जी, मंगल देव और पितरों की साधना के लिए महा-कल्याणकारी माना गया है.

  • दोपहर में पितृकर्म: 14 जुलाई को सुबह से लेकर दोपहर तक अमावस्या व्याप्त रहेगी. इस दिन दोपहर के समय पितरों का तर्पण, श्राद्ध या धूप-ध्यान करने से अक्षय पुण्य मिलता है.
  • सुख-समृद्धि के लिए दान: इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद जरूरतमंदों को तिल, गुड़, वस्त्र या अन्न का दान करने से परिवार को पितरों का अखंड आशीर्वाद मिलता है.

इस महासंयोग पर कैसे करें पूजा? 

  1. संकल्प: घर के साफ जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें.
  2. शिवलिंग अभिषेक: पास के शिव मंदिर जाएं. शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध, दही, शहद और शुद्ध गंगाजल अर्पित करें.
  3. सामग्री अर्पण: महादेव को अक्षत (साबुत चावल), चंदन और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं.
  4. मंत्र जप और आरती: मंदिर या घर में शांत मन से बैठकर कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और कपूर से आरती करें.
  5. मंगलवार को दान: अगले दिन (14 जुलाई) सुबह स्नान के बाद पितरों के नाम से दान अवश्य निकालें.

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