
आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में निजी समिति बनाकर चंदा और चांदी एकत्रित किए जाने का मामला अब जांच के दायरे में है. इस पूरे मामले पर अब तक कोई भी खुलकर सामने नहीं आया था, लेकिन अब पहली बार आरोपों से घिरी सुदर्शन समिति ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है. समिति का कहना है कि उसने जो भी काम किया, वह प्रशासन की जानकारी में और पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया.
दान देने वालों के नाम मंदिर में दर्ज
मंदिर से मिली जानकारी के मुताबिक, मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए आधा किलो या उससे ज्यादा चांदी दान करने वाले श्रद्धालुओं के नाम मंदिर परिसर में पत्थर पर अंकित किए गए हैं. इस सूची में तत्कालीन एसडीएम मिलिंद ढोके और तत्कालीन तहसीलदार प्रीति भिनसे के नाम भी शामिल हैं.
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बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों ने मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए एक-एक किलो चांदी दान की थी. इन जानकारियों के सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है.
सुदर्शन समिति ने रखा अपना पक्ष
विवाद के बीच पहली बार सुदर्शन समिति के सदस्य बलराम जाधव सामने आए. उन्होंने कहा कि समिति के जरिए जो भी चंदा और चांदी एकत्रित की गई, उसकी पूरी जानकारी प्रशासन को थी.
उनके मुताबिक, दान में मिली राशि समिति के बैंक खाते में जमा की जाती थी और उसका नियमित ऑडिट भी कराया जाता रहा. उन्होंने दावा किया कि जांच समिति के सामने सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश कर दिए गए हैं और आगे भी जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा.
इधर कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति ने पूरे दिन मंदिर से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की. हालांकि जांच पूरी होने तक समिति के किसी भी सदस्य ने मीडिया के सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है.
रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि निजी समिति का गठन किन परिस्थितियों में हुआ, उसका कानूनी आधार क्या था और चंदा व चांदी के संग्रह और उपयोग में सभी नियमों का पालन किया गया या नहीं. जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे विवाद की तस्वीर साफ हो सकेगी.