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खामेनेई का यूपी के बाराबंकी से क्या रिश्ता? अंतिम संस्कार से पहले यहां के लोग क्यों हो रहे भावुक | up Barabanki people grieving and remembering ayatullaha Khamenei during funeral in iran


लखनऊ:

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के दुनिया से जाने के बाद, ईरान में चल रहे 7 दिनों के राजकीय अंतिम संस्कार की गूंज उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भी सुनाई दे रही है.सवाल ये है कि आखिर ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन से यूपी के एक शहर के लोग इतने परेशान क्यों हैं, उनकी आंखें नम क्यों हैं. तो बता दें कि खामेनेई का बाराबंकी से खास कनेक्शन है.अयातुल्ला अली के परदादा का जन्म यहीं हुआ था. इसीलिए इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर बाराबंकी के किन्तूर गांव में रहने वाले खामेनेई के परिवार के सदस्य दुखी हैं और यहां के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बड़े बयान दिए हैं.

खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच बाराबंकी में शोक

 ईरान में 3 से 9 जुलाई तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार के बीच बाराबंकी में भी शोक का माहौल है. लोग उनकी हत्या पर दुख जता रहे हैं. अयातुल्ला परिवार के सदस्य रेहान काजमी ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के मौके पर अपना दुख जताते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है. दुनिया के हालात और गाज़ा संकट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज खामेनेई साहब के जाने से पूरी दुनिया के लोग दुखी हैं.

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वे मजलूमों की आवाज थे

उन्होंने कहा कि अयातुल्लाह सिर्फ ईरान के नेता नहीं, बल्कि दुनियाभर के मजलूम (दबे-कुचले) लोगों की आवाज थे. 28 फरवरी को जब उन पर हमला हुआ था, तब से पूरी दुनिया ने देखा कि ईरान ने किस तरह मजबूती से अपना बचाव किया और अपनी सही बात सबके सामने रखी. आज संयुक्त राष्ट्र (UN) और दूसरे देशों की रिपोर्टें भी कह रही हैं कि गाजा में बड़े पैमाने पर बेगुनाहों को मारा गया है. इजरायल ने फिलिस्तीनियों पर बहुत जुल्म किया है.

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अयातुल्ला के परिवार ने क्या कहा?

ईरान में चल रहे इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार में दुनिया भर के 100 से ज्यादा देशों के बड़े नेता और सरकारी अधिकारी शामिल हो रहे हैं. इसी सिलसिले में जब भारत से किसी बड़े दल (प्रतिनिधिमंडल) के वहां जाने की बात उठी, तो अयातुल्ला परिवार के वंशज मुफ्ती मोहम्मद कुली मुसावी और सैयद आदिल काजमी ने अपनी बात सामने रखी.

नम आंखों से कर रहे खामेनेई को याद

 उन्होंने कहा कि जहां तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति के वहां जाने का सवाल है, तो यहां से अभी तक कोई जिम्मेदार नहीं गया है. सरकार अपनी समझ और अंतरराष्ट्रीय नीतियों के हिसाब से काम कर रही है या नहीं, यह तो सरकार में बैठे लोग ही बेहतर समझ सकते हैं. फिलहाल बाराबंकी में अयातुल्ला खामेनेई के परिवार के लोग उन्हें नम आंखों से उन्हें याद कर रहे हैं.

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