

पटना:
बिहार के पटना के बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होना है. बांकीपुर वही सीट है, जहां से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन 4 बार विधायक रहे हैं. नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. इस उपचुनाव में बीजेपी ने अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है. अभिषेक कुमार का मुकाबला जन सुराज के प्रशांत किशोर से होगा.
बांकीपुर सीट से नितिन नवीन 2010 से विधायक थे. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने लगभग 52 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. मार्च में उन्हें बिहार से ही राज्यसभा भेजा गया है.
बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को वोटिंग होगी, जबकि 3 अगस्त को इसके नतीजे आएंगे. प्रशांत किशोर के मैदान में आने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.
बीजेपी के लिए खास है बांकीपुर
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का मुकाबला अब दिलचस्प हो गया है. BJP ने यहां अभिषेक कुमार को उम्मीदवार है. जन सुराज ने प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बना दिया है. वहीं महागठबंधन ने भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है.
बांकीपुर सीट भाजपा के लिए बहुत खास है. यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की रही है. उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव हो रहा है. इसलिए यह चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि भाजपा की साख से भी जुड़ गया है.
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है. कई चुनावों से यहां भाजपा लगातार जीतती रही है. इस इलाके में पार्टी का मजबूत संगठन है और उसका पारंपरिक वोट बैंक भी अच्छा माना जाता है. इसलिए भाजपा इस सीट पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती.
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प्रशांत किशोर के आने से मुकाबला दिलचस्प
प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने से मुकाबला और कड़ा हो गया है. जन सुराज इसे बदलाव की लड़ाई बता रही है. दूसरी ओर महागठबंधन भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी में है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा इस चुनाव को बिल्कुल हल्के में नहीं लेगी. क्योंकि अगर इस सीट पर मुकाबला कड़ा होता है या भाजपा हारती है, तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगा. वहीं अगर भाजपा जीतती है, तो वह इसे अपने मजबूत संगठन और जनता के भरोसे की जीत बताएगी.
दूसरी ओर, विपक्ष इस चुनाव को भाजपा को घेरने का बड़ा मौका मान रहा है. जन सुराज का कहना है कि बांकीपुर के लोग बदलाव चाहते हैं. पार्टी स्थानीय समस्याओं जैसे ट्रैफिक, जलजमाव, सफाई, पार्किंग और रोजगार को चुनाव का मुद्दा बना सकती है. महागठबंधन भी भाजपा के खिलाफ वोटों को एकजुट करने की कोशिश करेगा.
यह उपचुनाव अगले विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है. अगर भाजपा अपना गढ़ बचा लेती है, तो उसका मनोबल बढ़ेगा. लेकिन अगर विपक्ष भाजपा को कड़ी टक्कर देता है, तो यह संदेश जाएगा कि बिहार की राजनीति में मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो गया है.





