

लखनऊ:
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन बिसात बिछने लगी है. वहीं गठबंधनों में कहीं गांठ खुल रही है, तो कहीं बंध रही है. इस बीच सूबे के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयान ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है. राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदारी होगी. इसके अलावा उन्होंने मायावती के सम्मान की बात कही है और उनका कहना है कि वह बुलाएंगी तो मिलने जाऊंगा. राजेंद्र पाल गौतम के इस बयान पर अब तक समाजवादी पार्टी का रिएक्शन नहीं आया है, लेकिन तय है कि उनका बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा देगा.
राजेंद्र पाल गौतम को बड़ी जिम्मेदारी
कांग्रेस पार्टी ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शुक्रवार को राज्य के लिए राजेंद्र पाल गौतम को नया कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किया. गौतम ने इस अहम जिम्मेदारी के लिए अजय कुमार लल्लू की जगह ली है. भाजपा शासित राज्य में मतदाता अप्रैल 2027 के आसपास विधानसभा के 403 नए सदस्यों को चुनेंगे. 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने केवल दो सीटें जीती थीं.
यूपी में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन है. नए प्रभारी की नियुक्ति के बाद अब कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू करेगी. अगड़ी जाति से आने वाले अजय राय यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. समाजवादी पार्टी के पिछड़े और अल्पसंख्यक वोट बैंक के साथ कांग्रेस अगड़ा-दलित समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है.
80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस और सपा के पास 43 सीटें
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, मगर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के किसी भी नेता से बात कर लीजिए, वो आपको बताएंगे कि गठबंधन तो होगा हमारा मगर कब और कितनी सीटों पर होगा यह फिलहाल नहीं बता सकते. समाजवादी पार्टी जानती है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन से दोनों दलों को फायदा हुआ था. उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस और सपा के पास 43 सीटें है. यही वजह है कि दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि विधानसभा में भी जरूर गठबंधन होगा.
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अखिलेश यादव भी उत्तर प्रदेश के हरेक जिले का दौरा कर रहे है. यह देख रहे हैं कि किन सीटों पर उनका दबदबा ज्यादा है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच जहां तक सीटों के बंटवारे की बात है, वो अखिलेश और राहुल गांधी मिल बैठ कर तय करेंगे. सीटों की संख्या को लेकर मोल भाव जरूर होगा, मगर दोनों पार्टियों के नेताओं को उम्मीद है कि जब बात होगी, तब देखी जाएगी और समय आने पर उसका भी समाधान निकाल लिया जाएगा.
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