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Lucknow Fire: ’15 मौतें अखिलेश के कुकृत्यों का नतीजा’, अलीगंज अग्निकांड पर डिप्टी सीएम पाठक का तीखा हमला | Politics start on 15 deaths in Lucknow fire incident Deputy CM Brajesh Pathak’s scathing attack over the Aliganj fire tragedy says the result of Akhilesh Yadav misdeeds’



Lucknow Fire Breakout Latest Update: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक और रूह कंपा देने वाले अग्निकांड पर अब उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह से सुलग उठी है. विपक्षी नेता व सपा मुखिया अखिलेश यादव की ओर से इस हादसे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिशों पर सूबे के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बेहद आक्रामक पलटवार किया है. ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यह हृदयविदारक हादसा आपकी सरकार के समय फले-फूले भ्रष्टाचार और कुकृत्यों का एक जीता जागता नमूना है.

डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि इस दर्दनाक घटना में 15 बेकसूर लोगों की जान चली गई है और आप बंद एसी कमरे में बैठकर इस पर घटिया राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि इस ‘लाक्षाग्रह’ नुमा अवैध बिल्डिंग की नींव से लेकर इसे संरक्षण देने तक का पूरा पाप सपा शासनकाल की मशीनरी का है.

 सील होने के बाद भी कैसे खुली सील? 

ब्रजेश पाठक ने अलीगंज की इस विवादित बिल्डिंग की पूरी कुंडली मीडिया के सामने रखते हुए अखिलेश सरकार के तथाकथित ‘भ्रष्टाचार के इकोसिस्टम’ को बेनकाब किया. उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से बताया कि कैसे नियमों को रौंदा गया. 

  •  अखिलेश राज में नक्शा पास: यह प्लॉट भले ही 1980 में लॉटरी से आवंटित हुआ था, लेकिन असली खेल अखिलेश यादव के राज में शुरू हुआ. 20 अगस्त 2014 को अखिलेश सरकार ने इस 1992 वर्गफुट के प्लॉट पर ‘आवासीय नक्शा’ पास किया था.
     
  •  ध्वस्तीकरण का आदेश रद्द: साल 2016 में इस बिल्डिंग में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और 10 मई 2016 को एलडीए ने इसके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया. लेकिन महज 2 महीने बाद, 5 जुलाई 2016 को अचानक अखिलेश सरकार ने ऊपरी दबाव में इस ध्वस्तीकरण के आदेश को ही रद्द कर दिया.
     
  •  सैटेलाइट तस्वीरों का सबूत: गूगल सैटेलाइट की तस्वीरें गवाही देती हैं कि दिसंबर 2015 तक यह प्लॉट पूरी तरह खाली था. फरवरी 2016 में धड़ल्ले से अवैध निर्माण शुरू हुआ और जून 2016 तक पूरी इमारत तान दी गई.
इन सबूतों को पेश करने के बाद डिप्टी सीएम पाठक ने कहा कि जब बिल्डिंग सील हो चुकी थी, तो आखिर किसके इशारे और किस दबाव में अखिलेश सरकार ने इसकी सील खोलकर ध्वस्तीकरण का आदेश रद किया था? उस समय किसी दोषी अधिकारी पर गाज क्यों नहीं गिरी? आज जो 15 जानें गई हैं, उसकी सीधी जवाबदेही अखिलेश यादव की लापरवाही की है.

सीएम योगी खुद ले रहे अपडेट, 4 अफसर सस्पेंड

डिप्टी सीएम ने सरकार की त्वरित कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सारे पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम रद कर तत्काल घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा किया. पीड़ित परिवारों को हर हाल में न्याय दिलाने के लिए सरकार ने रात में ही एक्शन शुरू कर दिया था. इस लापरवाही के मामले में अब तक 4 बड़े अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की गहनता से जांच के लिए एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है. ब्रजेश पाठक ने भरोसा दिलाया कि एसआईटी की रिपोर्ट आते ही इस भ्रष्टाचार की चेन में शामिल हर एक चेहरे को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.

 ‘आवासीय भवनों में कमर्शियल काम बंद करो’ 

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक ‘बड़ा और कड़ा सबक’ बताया है. शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों, अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी और एसडीआरएफ के कप्तानों के साथ एक हाई प्रोफाइल समीक्षा बैठक करते हुए सीएम योगी ने साफ कर दिया कि प्रदेश में अब फायर सेफ्टी मानकों से रत्ती भर भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जो भवन जिस गतिविधि के लिए स्वीकृत है, वहां सिर्फ वही काम होगा. आवासीय क्षेत्रों में बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां तुरंत बंद की जाए.

बेसमेंट में कोचिंग और नर्सिंग होम पर पूर्ण प्रतिबंध

मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेशभर के सभी जिला प्रशासनों को ‘मिशन मोड’ में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने का हुक्म दिया है. इसके तहत कुछ बेहद कड़े नियम तय किए गए हैं. 

  •  बेसमेंट का उपयोग सिर्फ पार्किंग: किसी भी परिस्थिति में इमारतों के बेसमेंट (Basement) में कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी या नर्सिंग होम का संचालन नहीं होने दिया जाएगा. अगर बेसमेंट पार्किंग के लिए पास है, तो वहां सिर्फ गाड़ियां ही खड़ी होंगी.
     
  •  फायर एनओसी का डिस्प्ले: सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, शॉपिंग मॉल्स और कोचिंग सेंटर्स को अग्निशमन विभाग से मिली एनओसी (NOC) को अपने परिसर में मुख्य द्वार पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा.
     
  •  बिजली के लोड की जांच: सभी कमर्शियल बिल्डिंग्स के विद्युत भार (Electrical Load) का दोबारा आकलन किया जाएगा. निर्धारित मानक से ज्यादा लोड या अवैध वायरिंग मिलने पर सीधे बिल्डिंग सील की जाएगी.
     
  •  पहले अवेयरनेस, फिर एक्शन: सीएम ने अधिकारियों को हिदायत दी कि इस अभियान के नाम पर किसी भी आम नागरिक या व्यापारी का बेवजह उत्पीड़न नहीं होना चाहिए. पहले बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाकर नियमों की जानकारी दी जाए, उसके बाद भी उल्लंघन करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई हो.

 रिस्पॉन्स टाइम कम करने और फायर स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने संकट के समय राहत और बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी आपातकालीन एजेंसियों (फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, एसडीआरएफ) को अपना ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (घटनास्थल पर पहुंचने का समय) और ज्यादा कम करने के निर्देश दिए हैं.

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बैठक में महानिदेशक अग्निशमन सेवा ने बताया कि यूपी की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी फायर स्टेशन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. इसके अलावा 26 नए फायर स्टेशन उद्घाटन के लिए तैयार हैं और 25 का काम तेजी से चल रहा है. सीएम ने बचे हुए इलाकों में भी आधुनिक उपकरणों और नई तकनीकों की उपलब्धता में किसी भी तरह का विलंब न करने की बात दोहराई है, क्योंकि जनसुरक्षा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.





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