धर्म

दिवाली पर कुत्तों को पहनाते हैं माला, कौओं को खिलाते हैं खाना… आखिर क्यों?


Yam Panchak 2026: दिवाली पर भारत में घरों को दीयों से सजाया जाता है, लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. लेकिन पड़ोसी देश नेपाल में दिवाली से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है, जिसमें कौए को भोजन कराया जाता है, कुत्ते को फूलों की माला पहनाई जाती है और गाय की पूजा की जाती है.

पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व को यम पंचक या तिहार कहा जाता है. इसके पीछे मृत्यु के देवता यमराज, उनकी बहन यमुना और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं.

क्या है यम पंचक और दिवाली से इसका क्या संबंध है?

नेपाल में तिहार के पांच दिनों को यम पंचक भी कहा जाता है. यह पर्व भारतीय दिवाली से जुड़ा है, लेकिन इसकी पूजा-पद्धति अलग है. इन पांच दिनों में कौआ तिहार, कुकुर तिहार, गाय तिहार और लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा तथा भाई टीका जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं.

मान्यता है कि इस अवधि में यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा का विशेष महत्व है. पर्व का समापन भाई टीका से होता है, जब बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.

कौए को क्यों माना जाता है यमराज का संदेशवाहक?

यम पंचक की शुरुआत काग तिहार से होती है. नेपाली लोकमान्यताओं में कौए को यमराज का संदेशवाहक माना जाता है. इस दिन घरों की छतों और आंगन में कौओं के लिए भोजन रखा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से अशुभ समाचारों और अनिष्ट से रक्षा की कामना पूरी होती है. कौए का संबंध पितरों से भी जोड़ा जाता है, हालांकि काग तिहार की अपनी अलग सांस्कृतिक परंपरा है.

कुत्ते को माला पहनाकर क्यों की जाती है पूजा?

यम पंचक का दूसरा प्रमुख अनुष्ठान कुकुर तिहार है. धार्मिक मान्यताओं में कुत्ते को यमराज के द्वार का रक्षक और संदेशवाहक माना गया है. इस दिन पालतू ही नहीं, सड़क पर रहने वाले कुत्तों को भी तिलक लगाया जाता है, फूलों की माला पहनाई जाती है और भोजन दिया जाता है.

यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. कुत्ते की वफादारी, सुरक्षा और मनुष्य के साथ उसके संबंध को भी सम्मान देती है.

गाय की पूजा का यम पंचक से क्या संबंध है?

गाय तिहार में गाय को लक्ष्मी का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है. गाय को तिलक लगाया जाता है, माला पहनाई जाती है और चारा खिलाया जाता है. इसके बाद लक्ष्मी पूजा और दीपदान की परंपराएं निभाई जाती हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, तिहार में गाय के साथ बैलों का भी विशेष सम्मान किया जाता है.

यमराज पांच दिनों तक अपनी बहन के घर क्यों रहे?

यम पंचक से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यमराज पांच दिनों तक अपनी बहन यमुना के घर अतिथि बनकर रहे थे. यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया. इसी कथा से भाई टीका की परंपरा जुड़ी मानी जाती है. अंतिम दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं. नेपाल सरकार के सांस्कृतिक विवरण में भी इसी कथा को यम पंचक नाम का आधार बताया गया है.

यम पंचक 2026 कब है?

नेपाल के काठमांडू महानगरपालिका के कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष तिहार के प्रमुख अनुष्ठान इस प्रकार हैं.

7 नवंबर- काग तिहार                          
8 नवंबर- कुकुर तिहार और लक्ष्मी पूजा        
9 नवंबर- गाय तिहार                          
10 नवंबर- गोवर्धन पूजा, म्ह पूजा और बैल पूजा
11 नवंबर- भाई टीका                          

यम पंचक की सबसे दिलचस्प बात यही है कि यहां दिवाली केवल धन और समृद्धि का उत्सव नहीं रहती. कौए से लेकर कुत्ते, गाय और बैल तक को सम्मान देकर मनुष्य प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति अपना आभार प्रकट करता है. वहीं भाई टीका इस पांच दिवसीय पर्व को पारिवारिक रिश्तों और दीर्घायु की कामना के साथ पूरा करता है.

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