

धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक महीने के त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार कार्तिक महीने की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे से शुरू होकर अगले दिन 7 नवंबर को सुबह 10:48 बजे समाप्त होगी यानी इस बार धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के साथ ही दिवाली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है. इस दिन लोग कई नई चीजें खरीदते हैं, क्योंकि धनतेरस पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही धनतेरस के दिन दीपक भी जलाए जाते हैं. चलिए आपको बताते हैं धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए और धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक क्यों जलाते हैं?
धनतेरस पर शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त की बात करें, तो सुबह 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक खरीदारी की जा सकती है. इसके बाद शाम 6.18 बजे से रात 8.10 बजे तक पूजा का मुहूर्त रहेगा. इस दिन भगवान धनवंतरि, कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इसके अलावा नई चीजें खरीदी जाती हैं. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ नई चीजों की खरीदारी करने से लोगों के धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है.
धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन 13 दीये जलाने चाहिए. मान्यता है कि इस दिन 13 दीये जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. इस दिन घर के अलग-अलग कोनों, रसोई, नल के पास, बालकनी या छत पर दीये रखे जाते हैं. हालांकि, कई जगहों पर अपनी पारिवारिक परंपरा या श्रद्धा के अनुसार 1, 4, 11 या अपनी क्षमता के अनुसार भी दीये जलाए जाते हैं.
धनतेरस पर यम दीप की क्या मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों के अनुसार, धनतेरस की शाम को यमराज के नाम यानी यम का दीपक भी जलाया जाता है. इस दिन दीपदान करने से परिवार के सदस्यों पर मृत्यु के देवता यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का संकट टलता है. यम के दीपक का मुख दक्षिण दिशा रखना चाहिए.
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