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ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि कोई भी टारगेट हमसे दूर नहीं, कहीं भी कर सकते हैं हमला: एयरफोर्स चीफ एपी सिंह | Operation Sindoor has proven that no target is beyond our reach Air Force Chief AP Singh


नई दिल्ली:

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने रविवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और 200 किलोमीटर भीतर तक भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों ने ये साबित कर दिया कि कोई भी लक्ष्य उसकी पहुंच से बाहर नहीं है. वायुसेना प्रमुख के इस बयान को पाकिस्तान के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. वायुसेना प्रमुख ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने वायुसेना के क्षमता-केंद्रित अप्रोच की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने किसी भी संकट में सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायुसेना की निर्णायक भूमिका की एक बार फिर पुष्टि की है.

हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने आगाह किया कि वायुसेना के इस दृष्टिकोण की पुष्टि होने का मतलब यह नहीं है कि हम यहीं रुक जाएं. हमें अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने और उनका विस्तार करने की जरूरत है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चार दिन तक इस अभियान की कमान संभालने वाले वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘सैन्य अभियान के स्तर पर यह सीख सबसे अहम है कि हमें हमेशा अपने पास कई विकल्प रखने चाहिए और दुश्मन के अपनी रणनीति बदलने पर तेजी से उसके अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए.”

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उन्होंने कहा, ‘‘क्षमता-केंद्रित बल इस मामले में स्वाभाविक रूप से बेहतर होता है क्योंकि वह किसी एक साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के साधनों का इस्तेमाल कर सकता है. इसी लचीलेपन की वजह से हम जरूरत के अनुसार अपनी जवाबी कार्रवाई तय कर पाए और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में सफल रहे.”

पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पिछले साल मई में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मौजूद आतंकवादी ढांचे पर सटीक हमले किए. यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से भारत की ओर से सीमा पार की गई सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई थी.

एयर चीफ मार्शल ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि हमने जो रास्ता चुना है, वह सही है. हम और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे, ताकि अगर देश को फिर हमारी जरूरत पड़े तो भारतीय वायुसेना और भी तेजी से, अधिक सटीक और निर्णायक ढंग से देश की शर्तों पर कार्रवाई कर सके.”

वायुसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि स्वदेश में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर उसे भारी नुकसान पहुंचाया. साथ ही पूरे अभियान के दौरान वायुसेना ने किसी अन्य व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता भी पूरी की.

उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर मुख्य रूप से वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि था. हमने अलग-अलग विमानों और हथियार प्रणालियों के बारे में सोचने के बजाय क्षमता के आधार पर विचार करना शुरू किया है जिसके तहत हर विमान, सेंसर, हथियार और नेटवर्क को एकीकृत किया गया.”

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ए. पी. सिंह ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य अभियानों के दौरान उसी दृष्टिकोण को साकार किया और यह सफल रहा. इसने देश में किसी भी संकट के समय सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को फिर से साबित किया. साथ ही, इसने गति, सटीकता, एकीकरण और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता के निरंतर महत्व की भी पुष्टि की.”

एयर चीफ मार्शल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनाई गई रणनीति, सामरिक विकल्प, चुनौतियों और मारक क्षमता से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि इस अभियान की सफलता किसी एक हथियार या मंच की वजह से नहीं मिली, बल्कि यह सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कई स्तरों वाली वायु रक्षा प्रणाली एवं मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) का मुकाबला करने की क्षमताओं का नतीजा था जहां सभी ने एक प्रणाली के रूप में मिलकर काम किया.

उन्होंने कहा, ‘‘कार्रवाई के मोर्चे पर पूरे पश्चिमी मोर्चे में 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र और 200 किलोमीटर भीतर तक पूरे इलाके में सटीक निशाना लगाने की क्षमता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है. हमारे स्वदेशी हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया. साथ ही हमने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी नागरिक या असैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हो.”

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से बड़ी संख्या में दागे गए ड्रोन और दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों को विफल कर दिया. इससे देश को आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई करने में मदद मिली.

उन्होंने कहा कि अब वायुसेना को अपनी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी क्षमता, मजबूत नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा. साथ ही, हमें मजबूत रसद, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और इन सबसे ऊपर उठकर स्वदेशी उत्पादन के जरिए लंबे समय तक उच्च-तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने की क्षमता विकसित करनी होगी. इन सभी मोर्चों पर पहले से ही काम जारी है.

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एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना का दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है, क्योंकि विकसित भारत को सुरक्षित और संकटों का सामना करने में सक्षम देश भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए इसका अर्थ ऐसी बहु-क्षेत्रीय वायु शक्ति के रूप में विकसित होना है जो हर तरह के संघर्ष में भारत के बढ़ते आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके.

उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए पूरे राष्ट्र के स्तर पर प्रयास करने होंगे और भारतीय वायुसेना इसमें अपनी पूरी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है. साल 2047 तक हमारा लक्ष्य दुनिया की सबसे सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में से एक बनना है, ऐसी शक्ति जो विकसित भारत की रक्षक होने के साथ-साथ उसकी प्रगति की प्रेरक भी बने.

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