

जब बॉलीवुड ने दुर्गा पूजा को बना दिया बेहद स्पेशल
नई दिल्ली:
संजय लीला भंसाली और करण जौहर जैसे फिल्म निर्माताओं ने दुर्गा पूजा को खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा. ‘डोला रे डोला’ और ‘ढिंडोरा बाजे रे’ जैसे हिट गाने दिए हैं, जो सिनेमा के इतिहास में दर्ज हो गए हैं. ‘डोला रे डोला’ एक यादगार गाना है, जो हाल ही में इस महीने एक ग्लोबल पेजेंट पर भी देखने को मिला. वहीं, ‘ढिंडोरा बाजे रे’ के लिए कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेंट को उनका दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. लाल रंग, स्त्रीत्व और देवी दुर्गा की ऊर्जा का प्रतीक ये गाने हर साल दुर्गा पूजा के जश्न का अहम हिस्सा होते हैं और इस त्योहार की असली भावना को जीवंत कर देते हैं.
कहानी में बड़ा मोड़
दुर्गा पूजा के दौरान दिखने वाली भव्यता और सामुदायिक भावना का इस्तेमाल अक्सर भारतीय सिनेमा में किसी बड़े ट्विस्ट के लिए किया जाता है. 2012 की फिल्म ‘कहानी’ के क्लाइमेक्स में विद्या बालन का अपने नकली ‘बेबी बंप’ का ट्विस्ट करना कौन भूल सकता है? इसे आज भी सिनेमा के इतिहास के सबसे बेहतरीन ट्विस्ट में से एक माना जाता है. फिल्म ‘गुंडे’ में यह त्योहार एक अहम मोड़ साबित होता है, जो रणवीर सिंह और अर्जुन कपूर के किरदारों के बीच के इक्वेशन को बदल देता है. इसमें प्रियंका चोपड़ा का किरदार उनमें से एक को जश्न में बुलाती है, ताकि उनके बीच के रिश्ते को तोड़ा जा सके. यहां जश्न की भव्यता और उसके साथ जुड़ी हिंसक त्रासदी एक-दूसरे के सामने आती हैं, जो कहानी को एक नई दिशा देती हैं.
बंगाली संस्कृति की एक झलक
बंगाली संस्कृति को समझने के लिए दुर्गा पूजा से बेहतर कुछ नहीं है और बॉलीवुड इसका इस्तेमाल बहुत ही बेहतरीन ढंग से करता है. शूजित सरकार की फिल्म ‘विक्की डोनर’ में यामी गौतम का बंगाली किरदार आयुष्मान खुराना के पंजाबी नायक को अपने जीवन की झलक दिखाता है. जब वह उसे अलग-अलग पूजा पंडालों में ले जाती है. ‘बुलबुल’ में दुर्गा पूजा और काली पूजा के इस्तेमाल से बंगाल के माहौल को और भी उभार दिया गया है, जबकि ‘परिणीता’ में पूजा का सीन रोमांस को आगे बढ़ाने का काम करता है, जो अलग-अलग पड़ावों पर कोमलता, जलन और सुरक्षा की भावनाओं को दर्शाता है.
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