

कई लोग ऐसे लोग हैं, जिन्हें अच्छी खासी डिग्री होने के बावजूद सही से नौकरी नहीं मिल रही है. जब से AI का दौर आया है, तब से कई सेक्टर में हजारों लोग नौकरी से बाहर कर दिए गए. एक तरफ जहां नौकरी के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं तो कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो लाखों रुपये की नौकरी एक पल में छोड़ दे रहे हैं. IIT दिल्ली से पढ़े 2 लड़कों ने 1.3 करोड़ रुपये से ज्यादा सैलरी वाली नौकरी को बॉय बॉय बोल दिया. बड़ी बात है कि इन्होंने जॉब छोड़ने के फैसले के बारे में अपने घर वालों को भी नहीं बताया.
फर्स्ट ईयर में अनिरुद्ध से मिले प्रत्युष
लखनऊ के रहने वाले प्रत्युष सैनी ने 2023 में IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया है. IIT दिल्ली में ही फर्स्ट ईयर के समय ही प्रत्युष की मुलाकात अनिरुद्ध कुलकर्णी से हुई, जो डुअल B.Tech-M.Tech डिग्री के साथ ग्रेजुएशन कर रहे थे. 2023 डिग्री पूरा करने के बाद अगले साल प्रत्युष को AI साइबरसिक्योरिटी फर्म Simbian में प्रत्युष को 50 लाख रुपये सालाना की नौकरी मिली. वहीं, अनिरुद्ध कुलकर्णी को 2024 में Quantbox Research में 88 लाख का पैकेज मिला था.
एक ही हॉस्टल में रहे दोनों
Hindustan Times के अनुसार, प्रत्युष ने बताया कि वह और अनिरुद्ध दोनों एक ही हॉस्टल में रहे और अपने सभी असाइनमेंट और ग्रुप प्रोजेक्ट्स साथ मिलकर करते थे. दोनों की शुरुआत से बॉन्डिंग काफी मजबूत थी. इसी की वजह से दोनों ने एक साथ मिलकर काम करने और स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया.
नौकरी छोड़ने के बाद शुरू किया LawSutra
अच्छे पैकेज वाली नौकरी छोड़ने के बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने भारत के वकीलों के लिए AI-बेस्ड लीगल रिसर्च प्लेटफ़ॉर्म LawSutra शुरू किया. इसके बाद इसी साल उनके इस स्टार्टअप को Manupatra ने खरीद लिया. हालांकि, यह नहीं पता चला सका कि Manupatra ने LawSutra को कितने में खरीदा. इसके बाद इन दोनों ने जून 2026 में ByteAsk शुरू किया, जबकि ठीक इससे पहले मई 2026 में नए आइडिया पर काम किया. इस बार उन्होंने AI मॉडल को लो-लेवल कोडिंग भाषाओं के साथ काम करने में आ रही दिक्कतें पर ध्यान दिया. ये सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की एक बड़ी समस्या है.
ByteAsk के जरिए Y Combinator तक पहुंचे
जब उनसे पूछा गया कि OpenAI और Anthropic जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा बनाए गए कोडिंग एजेंट से ByteAsk कैसे अलग है, तो प्रत्युष ने बताया कि अगर आप किसी C डेवलपर से पूछें, तो उनमें से ज़्यादातर AI के खिलाफ़ हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) पर भरोसा नहीं है. IITian ने बताया कि मौजूदा मॉडल की Python में सटीकता (accuracy) लगभग 80-90% है, लेकिन बेंचमार्क पर C में यह 10 से 15% के आसपास है.
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C++ एक सिस्टम-लेवल भाषा है, इसका हार्डवेयर पर पूरा कंट्रोल होता है, इसलिए आपको बहुत सावधान रहने की ज़रूरत होती है. ByteAsk का मकसद खास तौर पर C और C++ एनवायरनमेंट के लिए बनाए गए AI कोडिंग एजेंट विकसित करके इस अंतर को कम करना है.
ByteAsk के अनोखे फोकस की वजह से इसे Y Combinator में जगह मिली, जो एक एक्सेलेरेटर प्रोग्राम है और जिसकी ग्लोबल एक्सेप्टेंस रेट 1% से भी कम है. इस सिलेक्शन के साथ ही उन्हें $1 मिलियन (करीब 10 करोड़ रुपये) की प्री-सीड फंडिंग भी मिली. ByteAsk के CEO कुलकर्णी पहले ही अमेरिका जा चुके हैं, वहीं सैनी अभी बेंगलुरु में हैं और नवंबर में अमेरिका जाएंगे.
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