

IIT Bombay Insight Survey 2026 : देश के प्रतिष्ठित टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के स्टूडेंट्स की एकेडेमिक प्रियोरिटीज, करियर संबंधी चिंताओं और कैंपस जीवन को समझने के लिए किए गए Insight Senior Survey 2026 में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. सर्वे में बेहतर प्लेसमेंट के अवसरों, कंप्यूटर साइंस की लोकप्रियता, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक ईमानदारी जैसे मुद्दों पर विद्यार्थियों की राय सामने आई है. सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि टेक्निकल एजुकेशन हासिल करने वाले छात्रों के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि भविष्य में रोजगार के अवसर और करियर की दिशा भी जरूरी हैं.
बेहतर प्लेसमेंट के लिए कंप्यूटर साइंस की तरफ झुकाव
सर्वे के अनुसार, करीब 25 फीसदी विद्यार्थियों ने कहा कि अगर उन्हें अपनी ब्रांच बदलने का मौका मिलता, तो वे कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग चुनते. वहीं, 32.4% विद्यार्थियों ने बेहतर प्लेसमेंट के अवसरों को ब्रांच बदलने की संभावित वजह बताया. ये आंकड़े बताते हैं कि सर्वे में शामिल कुछ विद्यार्थियों के लिए रोजगार की संभावनाएं और ब्रांच का चुनाव आपस में जुड़े हुए हैं. हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि IIT बॉम्बे के सभी विद्यार्थी कंप्यूटर साइंस को प्राथमिकता देते हैं या मौजूदा ब्रांच से असंतुष्ट हैं.
बड़े शहरों से आने वाले छात्रों का दबदबा
विद्यार्थियों की सामाजिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि पर भी सर्वे में जानकारी जुटाई गई. इसमें हिस्सा लेने वाले 32.6% स्टूडेंट्स बड़े शहरों से और 20.8% महानगरों से थे. वहीं, 37.5% स्टूडेंट्स छोटे शहरों या कस्बों से आए थे, जबकि 9% विद्यार्थियों की बैकग्राउंड ग्रामीण थी. इस तरह सर्वे में जवाब देने वाले 53.4% स्टूडेंट बड़े शहरों और महानगरों से थे.
फैमिली बैकग्राउंड और हायर एजुकेशन लेवल
सर्वे में स्टूडेंट्स के माता-पिता की एजुकेशनल बैकग्राउंड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई. 85% से अधिक स्टूडेंट्स ने बताया कि उनके माता-पिता ने सााइंस, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित या अन्य विषयों में ग्रेजुएट अथवा पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा हासिल की है. हालांकि, यह आंकड़ा केवल सर्वे में शामिल विद्यार्थियों के जवाबों पर आधारित है और इसे पूरे संस्थान के विद्यार्थियों की फैमिली बैकग्राउंड का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता.
करियर को लेकर अनिश्चितता, उच्च शिक्षा और शोध में भी रुचि
सर्वे का एक महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों की भविष्य की योजनाओं से जुड़ा है. इसके मुताबिक, करीब 32 फीसदी विद्यार्थी इस बात को लेकर निश्चित नहीं थे कि वे अगले पांच सालों तक अपने मौजूदा क्षेत्र में काम करना जारी रखेंगे या नहीं. वहीं, 28फीसदी स्टूडेंट्स अपने वर्तमान क्षेत्र से बाहर निकलने की योजना होने की बात कही.
इसके अलावा, 21 फीसदी स्टूडेंट्स ने कहा कि अगर आर्थिक बाधाएं उनके फैसले को प्रभावित नहीं करतीं, तो वे उच्च शिक्षा या शोध को प्राथमिकता देते. ये आंकड़े सर्वे में शामिल विद्यार्थियों के बीच करियर के अलग-अलग विकल्पों और भविष्य की योजनाओं को लेकर मौजूद विविधता को दर्शाते हैं. हालांकि, सर्वे यह स्पष्ट नहीं करता कि इन विद्यार्थियों के लिए करियर बदलने की मुख्य वजह नौकरी से असंतुष्टि, व्यक्तिगत रुचि, आर्थिक दबाव या कोई अन्य कारण था.
शैक्षणिक ईमानदारी पर भी पूछे गए सवाल
सर्वे में असाइनमेंट और परीक्षाओं के दौरान नकल से जुड़े सवाल भी शामिल थे. अधिकांश विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने कभी नकल नहीं की. वहीं, लगभग एक-चौथाई विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव या मजबूरी में एक-दो बार नकल की थी. ये जवाब विद्यार्थियों के खुद के बयानों पर आधारित हैं और इनके आधार पर संस्थान में नकल की व्यापकता के बारे में कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
मेंटल हेल्थ और काउंसलिंग की स्थिति
कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग को लेकर भी विद्यार्थियों से सवाल पूछे गए. सर्वे में 41 विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें कभी काउंसलिंग या थेरेपी की जरूरत महसूस नहीं हुई. वहीं, 33 विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने अपनी मुश्किलों का सामना करने के लिए दोस्तों और परिवार की मदद ली.
इसके अलावा, 24 विद्यार्थियों ने संस्थान की काउंसलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की बात कही. 25 विद्यार्थियों ने बताया कि वे काउंसलिंग लेना चाहते थे, लेकिन इसके लिए पहल नहीं कर पाए. ये आंकड़े बताते हैं कि सर्वे में शामिल विद्यार्थियों ने मेंटल हेल्थ संबंधी जरूरतों से निपटने के अलग-अलग तरीके बताए. हालांकि, इन जवाबों से पूरे कैंपस में मेंटल हेल्थ की स्थिति या काउंसलिंग सेवाओं की उपलब्धता और प्रभावशीलता का आकलन नहीं किया जा सकता.
केवल 144 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, निष्कर्षों की सीमा भी अहम
इस सर्वे के निष्कर्षों के साथ इसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में स्नातक होने वाले लगभग 2,400 विद्यार्थियों में से केवल 144 ने सर्वे में हिस्सा लिया. यानी कुल बैच के करीब 6 फीसदी स्टूडेंट्स ने ही जवाब दिए. इतने सीमित नमूने के आधार पर पूरे बैच की राय या अनुभवों का प्रतिनिधित्व होने की गारंटी नहीं दी जा सकती.
इसलिए सर्वे के आंकड़ों को IIT बॉम्बे के सभी विद्यार्थियों की सोच का अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय, इसमें भाग लेने वाले विद्यार्थियों की प्राथमिकताओं और अनुभवों के संकेत के रूप में देखना अधिक उचित होगा. फिर भी, ब्रांच के चुनाव, बेहतर प्लेसमेंट, करियर की दिशा और काउंसलिंग जैसे विषयों पर सामने आए जवाब उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के अनुभवों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी अवलेवल कराते हैं.
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