
अमेठी: उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के संग्रामपुर ब्लॉक एवं थाना क्षेत्र में स्थित मां कालिका का पौराणिक धाम कालिकन श्रद्धा, आस्था और धार्मिक मान्यताओं का प्रमुख केंद्र है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यह पावन स्थल महर्षि च्यवन की तपोस्थली रहा है. यहां विराजमान मां कालिका के दर्शन-पूजन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचते हैं.
प्रत्येक सोमवार को धाम में विशाल मेला लगता है, जिसमें अमेठी के कोने-कोने के साथ ही आसपास के कई जनपदों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर मां के चरणों में शीश नवाते हैं.
नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
नवरात्र के दिनों में कालिकन धाम की रौनक देखते ही बनती है. सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. भक्त मां कालिका के दर्शन-पूजन के साथ हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. पूरे नवरात्र धाम में भक्तिमय वातावरण बना रहता है. मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी अटूट विश्वास के चलते कालिकन धाम क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिना जाता है.
महर्षि च्यवन की तपोस्थली से जुड़ी है पौराणिक कथा
कालिकन धाम के पीठाधीश्वर श्री महाराज के अनुसार, पुराणों में महर्षि च्यवन की जिस तपोस्थली का वर्णन मिलता है, उसे संग्रामपुर स्थित कालिकन धाम से जोड़ा जाता है. इस स्थल से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार:
- एक बार अयोध्या के राजा अपनी पुत्री सुकन्या के साथ वन विहार करते हुए महर्षि च्यवन की तपोस्थली पहुंचे थे.
- उस समय महर्षि च्यवन गहन तपस्या में लीन थे और उनकी आंखें दीपक की लौ के समान चमक रही थीं.
- राजकुमारी सुकन्या ने उन चमकती रोशनियों को हीरा-जवाहरात समझ लिया और कौतूहलवश एक तिनके से उनकी आंखों में छेद कर दिया, जिससे महर्षि की आंखों से रक्त बहने लगा.
- महर्षि को कष्ट होने के कारण राजा के साथ आए सैनिकों और हाथी-घोड़ों के बीमार पड़ने की बात कथा में वर्णित है.
इसके बाद अयोध्या नरेश ने महर्षि से क्षमा मांगी और अपनी पुत्री सुकन्या का विवाह उनसे कर दिया. कुछ समय बाद वहां पहुंचे अश्विनी कुमारों ने महर्षि की आंखों की ज्योति वापस लाने और उन्हें युवा बनाने का आश्वासन दिया. कथा के अनुसार, उन्होंने अपनी शक्ति से महर्षि को स्वस्थ और युवा बना दिया.
सोमयज्ञ के दौरान प्रकट हुईं मां कालिका
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि च्यवन के अनुरोध पर अयोध्या नरेश ने सोमयज्ञ का आयोजन कराया, जिसमें देवताओं और अश्विनी कुमारों को आमंत्रित किया गया. अश्विनी कुमारों को सोमपान कराते देखकर इंद्र क्रोधित हो उठे और राजा पर वज्र से प्रहार करने के लिए उद्यत हुए. तब महर्षि च्यवन ने अपने स्तंभन मंत्र से इंद्र को जड़वत कर दिया.
कथा में वर्णन मिलता है कि अमृत की रक्षा के लिए ऋषियों के आह्वान पर कुंड की शिलापट पर मां कालिका प्रकट हुईं. मान्यता है कि उसी पवित्र स्थल पर आज मां कालिका का कालिकन धाम स्थापित है. यहां मां के अमृत कुंड पर विराजमान होने की धार्मिक मान्यता के कारण उन्हें “अमृत कुंड वासिनी” भी कहा जाता है.
स्थानीय धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि महर्षि च्यवन के आश्रम से च्यवनप्राश की उत्पत्ति की कथा जुड़ी हुई है. यही कारण है कि कालिकन धाम को केवल देवी उपासना का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्राचीन ऋषि परंपरा और भारतीय पौराणिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल भी माना जाता है.
राजनीति से लेकर फिल्म जगत की हस्तियां भी टेक चुकी हैं माथा
कालिकन धाम की ख्याति अमेठी और आसपास के जनपदों तक ही सीमित नहीं है. यहां देश की कई जानी-मानी राजनीतिक हस्तियों और फिल्मी सितारों के पहुंचने की बात कही जाती है:
- राजनीतिक हस्तियां: पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी.
- सिनेमा जगत: प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन और राज बब्बर सहित कई प्रमुख हस्तियां समय-समय पर मां के दरबार में मत्था टेक चुकी हैं.
आस्था, पौराणिक परंपरा और जनविश्वास का संगम कालिकन धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. सोमवार के मेलों से लेकर नवरात्र की विशेष पूजा-अर्चना तक, यहां भक्तों की उपस्थिति इस धाम के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को दर्शाती है. अमेठी की धार्मिक पहचान में कालिकन धाम का विशिष्ट स्थान है.
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