
दिल्ली-NCR में रोजाना ऑफिस जाना हो या दोस्तों और परिवार के साथ कहीं घूमने निकलना, अपनी गाड़ी से सफर करना सुविधाजनक लगता है. हालांकि, ट्रैफिक में फंसने, गाड़ी चलाने की थकान और पार्किंग की चिंता के बीच ये सुविधा कई बार परेशानी भी बन जाती है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि क्या अपनी गाड़ी पार्क करके वे डेली कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट करके आसानी से कम्यूट कर सकते हैं. कई लोग इससे होने वाली दिक्कत को सोचते हुए ऐसा करने से बचते हैं. हालांकि, हमने इसको 1 महीने तक ट्राई किया और एक्सपीरियंस जानकर आपको यकीन नहीं होगा. तो चलिए आपको पूरी बात बताते हैं.
दरअसल कैब एग्रीगेटर Uber ने पहली भारत में एक चैलेंज शुरू किया. इस चैलेंज का नाम Uber ने One Less Car रखा. इस कैंपेन को The Quantum Hub (TQH) और YLAC के साथ मिलकर शुरू किया गया. इसके लिए कंपनी ने पब्लिक रजिस्ट्रेशन शुरू किया था. जिसमें सैकड़ों लोगों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई थी. अच्छी बात ये रही कि मुझे भी इसका हिस्सा बनने का मौका मिला. ऑफिस आने-जाने के अलावा मैंने पर्सनल कामों और फैमली और दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक महीने तक Uber की कैब का इस्तेमाल किया था. हालांकि, कई बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी इस्तेमाल भी मुझे करना पड़ा. मेरा इस चैलेंज को लेकर काफी अलग एक्सपीरियंस रहा.
चार हफ्ते तक Uber से सफर
इस चैलेंज के दौरान मेरे लिए सबसे बड़ा बदलाव ये था कि मुझे खुद गाड़ी चलाने की जरूरत नहीं थी. आमतौर पर ऑफिस जाते समय सड़क पर ट्रैफिक का ध्यान रखना, दूसरी गाड़ियों से बचकर चलना और सही समय पर पहुंचने की चिंता रहती है. लेकिन Uber से सफर करते हुए इन जिम्मेदारियों से काफी हद तक राहत मिली. कैब की पिछली सीट पर बैठकर आराम से सफर करना अपने आप में एक अलग अनुभव था. मुझे हर समय सड़क पर ध्यान देने की जरूरत नहीं थी.

अच्छी बात थी कि इस दौरान मैं अपने काम से जुड़े जरूरी मैसेज देख सकता था, खबरें पढ़ सकता था और ऑफिस पहुंचने से पहले पूरे दिन की प्लानिंग कर सकता था. इसके लिए मुझे अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ी. यानी मेरा काम केवल उबर कैब में बैठना आप सफर करना था बिना ड्राइविंग या ट्रैफिक की चिंता किए. इसकी वजह से एक चीज और अच्छी हुई कि ड्राइविंग के दौरान होने वाले थकान से मैं पूरी तरह बच गया. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि हर दिन सफर आसान ही रहा.
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कैब बुकिंग में कई बार हुई परेशानी
इस एक्सपेरिमेंट का दूसरा पहलू भी था. कई बार मुझे अपनी व्हीकल की कमी महसूस हुई. कई बार कैब बुक होने के बाद कैंसिल हो जाती थी या ड्राइवर का कॉल करके कैंसिल करने को कहता था. एक दिन पीक आवर के समय मुझे कैब ही नहीं मिली. जिसकी वजह से मुझे लास्ट मूवमेंट में अपनी गाड़ी से घर पहुंचना पड़ा. अपनी गाड़ी होने पर जरूरत के मुताबिक तुरंत निकलने की आजादी रहती है. लेकिन कैब पर निर्भर रहने की स्थिति में ड्राइवर के आने का इंतजार करना पड़ता है.
ये बदलाव और जो मुझे रोज के रूटीन में करना पड़ा था वह था 15 से 20 मिनट टाइम हाथ में लेकर चलना. ताकि कैब बुकिंग में देरी होने के बाद भी ऑफिस पहुंचने में ज्यादा लेट न हो. कई लोगों को ये चीजें परेशान कर सकती हैं. हालांकि, एक बार कैब में बैठने के बाद आप पूरी तरह से निंश्चित हो जाते हैं. मुझे UberOne Less Car कैंपेन के दौरान ये भी टेस्ट करना था कि बारिश के समय क्या कैब आसानी से बुक हो जाती है. लेकिन, दिल्ली-एनसीआर में उस टाइम बारिश नहीं होने की वजह से इसको मैं टेस्ट नहीं कर पाया.
पर्सनल कामों में कैब का यूज
मैंने इस एक्सपेरिमेंट के दौरान Uber का इस्तेमाल सिर्फ ऑफिस आने-जाने के लिए नहीं किया, बल्कि प्राइवेट कामों और दोस्तों या फैमली मेंबर्स से मिलने जैसे सोशल कामों के लिए भी किया. इससे ये समझने का मौका मिला कि प्राइवेट व्हीकल की जरूरत सिर्फ ऑफिस तक लिमिटेड नहीं है. कई तरह के छोटे-बड़े काम होते हैं, जिनके लिए लोग अपनी कार या बाइक निकालते हैं. ऐसी ट्रैवलिंग में कैब काफी उपयोगी साबित हो सकता है. हालांकि, कम दूरी के लिए इसका इस्तेमाल परेशानी ज्यादा खड़ी करता है क्योंकि आपको इंतजार करना पड़ता है और ऐसी स्थिति में ट्रैवल टाइम आपके इंतजार के टाइम के बराबर ही हो जाता है.
भारत में पहली बार हो रहा है One Less Car एक्सपेरिमेंट
आपको बता दें कि Uber ने इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और नॉर्थ अमेरिका में ‘One Less Car’ कैंपेन किया है. पहली बार दिल्ली-NCR में इसका आयोजन किया गया. ये इसका भारत में पहला वर्जन है. इस दौरान 25 व्हीकल ऑनर को सेलेक्ट किया गया. इसमें एक महीने तक उन्हें अपनी गाड़ी छोड़ Uber, ऑटो, बाइक, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दिल्ली मेट्रो जैसे ऑप्शन आजमाने का मौका मिला.
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