
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पहुंचे. वहां जो हुआ, और दिखा, वो आमतौर पर वर्तमान समय की राजनीति में कम दिखने को मिलता है. शनिवार को एक कैफ़ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ लंच और कॉफी करने के एक दिन सीएम विजय ने पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया, साथ मेट्रो की सवारी की और मंदिर के दर्शन किए.
सुरक्षा के खास इंतजाम
पीएम मोदी के राजधानी में होने के कारण चेन्नई पुलिस ने रविवार सुबह 8 बजे से लेकर शाम 4.30 बजे तक का ट्रैफिक डायवर्जन किया. इसके अलावा सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम देखने को मिले. हालांकि, प्रधानमंत्री के दौरे के समय ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा के इंतजाम करना राज्य सरकारों का काम होता है और सभी राज्य सरकारें ऐसा करती भी हैं, मगर तमिलनाडु सरकार ज्यादा सक्रिय दिखी. प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए 5 स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई और करीब 15,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई.
शॉल और गुलदस्ते के साथ मुलाकात
फिर पीएम मोदी के प्लेन पहुंचने से पहले ही मुख्यमंत्री विजय चेन्नई एयरपोर्ट पर पूरे लाव लश्कर के साथ पहुंचे. पीएम मोदी के आने की जानकारी के कारण पहले से ही एयरपोर्ट की सड़कों पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए थे. सीएम विजय के एयरपोर्ट पहुंचने की खबर आते ही लोगों को जुटना और भारी संख्या में होने लगा. विजय की कारों का काफिला सीधे एयरपोर्ट पहुंचा तब तक पीएम मोदी का प्लेन भी लैंड हो गया. वहां विजय ने पीएम मोदी को एक शॉल पहनाई और फुलों का गुलदस्ता दिलवाया. सबसे खास बात ये रही कि पीएम मोदी और सीएम विजय के चेहरे पर एक-दूसरे से मिलते समय आत्मीयता और एक-दूसरे के सम्मान का भाव दिखा.

साथ मेट्रो का सफर
इसके बाद पीएम मोदी के गाड़ियों के काफिले में ही सीएम विजय की गाड़ियां भी शामिल हो गईं और दोनों चेन्नई मेट्रो के फेज 2 के उद्घाटन के लिए निकल पड़े. इस दौरान पीएम मोदी अपनी गाड़ी से हाथ हिलाकर अपने समर्थकों और लोगों का अभिवादन करते नजर आए. पोरुर बाइपास मेट्रो स्टेशन पर पीएम मोदी और सीएम विजय ने मिलकर नई मेट्रो को हरी झंडी दिखाई. इस दौरान भी दोनों नेता बात करते और मुस्कुराते नजर आए. फिर दोनों नेताओं ने मेट्रो के टिकट खरीदे और आम लोगों की तरह मेट्रो के सफर का आनंद लिया. इस दौरान सीएम विजय पीएम मोदी के साथ बैठे नजर आए. दोनों नेता मेट्रो में सवार यात्रियों से बात भी करते नजर आए.
राहुल से मुलाकात कैसी रही
कुल-मिलाकर ऐसा लगा ही नहीं कि पीएम मोदी और सीएम विजय दो अलग-अलग दलों के नेता हैं और दोनों की पार्टियां आमने-सामने चुनाव लड़ती हैं. इससे एक दिन पहले सीएम विजय की राहुल गांधी के साथ मुलाकात भी खास रही. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सीएम विजय से मुलाकात की और कांग्रेस के युवाओं से जुड़ने के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के छठे संस्करण में भी हिस्सा लिया. छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम में शामिल होने से पहले गांधी मुख्यमंत्री विजय के नीलंकरई स्थित आवास पर पहुंचे.हाल ही में टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन को औपचारिक रूप से ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ (एसएसजेवी) नाम दिए जाने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी.

टीवीके के विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल होने के बाद दोनों नेताओं की भी यह पहली मुलाकात थी. यह बैठक मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में सत्तारूढ़ दल की जीत के तुरंत बाद हुई. टीवीके, कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) एसएसजेवी गठबंधन के घटक दल हैं. मुलाकात के बाद दोनों नेता एक ही कार में मुख्यमंत्री के आवास से निकले और पलवक्कम में कॉफी पीने गए. इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से खुलकर बातचीत की. इसके बाद राहुल गांधी छात्रों के साथ संवाद सत्र में हिस्सा लेने के लिए आइलैंड ग्राउंड्स रवाना हुए. शाम का कार्यक्रम पूरा करने के बाद राहुल गांधी नई दिल्ली रवाना हो गए.
चर्चा में क्यों ये मुलाकातें
सीएम विजय की इन दो मुलाकातों ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. राहुल गांधी से उनकी नजदीकी किसी से छिपी नहीं है. राहुल ने विजय के लिए अपने सबसे पुराने सहयोगी डीएमके और स्टालिन को छोड़ दिया. जाहिर है विजय भी उनका पूरा सम्मान करते ही होंगे. मगर आज पीएम मोदी के साथ विजय की केमेस्ट्री देखकर ज्यादातर लोग उनकी तारीफ करने लगे. एक सीएम के तौर पर उन्होंने अपने प्रोटोकॉल का पालन बहुत सहजता से किया. कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि सीएम विजय की राजनीति बीजेपी की सोच से मेल नहीं खाती. यही कारण है कि उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन तो नहीं ही किया बल्कि केंद्र सरकार के सहयोगी भी नहीं बने. वो इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने. मगर, इसका दूसरा तर्क ये भी है कि बीजेपी तमिलनाडु में बहुत बड़ी ताकत नहीं है. ऐसे में चुनाव से पहले गठबंधन नहीं करना कोई बड़ी बात नहीं है. चुनाव के बाद एनडीए में विजय की पार्टी के शामिल नहीं होने के पीछे एक कारण ये भी हो सकता है कि उनकी सरकार कांग्रेस के समर्थन से चल रही है. ऐसे में वो इंडिया गठबंधन में रहना उनकी मजबूरी भी हो सकती है.
तो फिर क्यों संबंध बढ़ा रहे विजय
ये अलग-अलग तरह की मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं, जब TVK के अंदर ‘विजय को PM बनाने’ की मांग उठ रही है और विजय की बढ़ती राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है. TVK सरकार का समर्थन करने वाली कांग्रेस, 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रही है. राहुल के साथ विजय की लंच और कॉफी वाली मुलाक़ात का मकसद शायद इन अटकलों को दूर करना था कि सहयोगियों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है.
ऐसे समझिए मामले को
बिजली मंत्री और TVK नेता निर्मल कुमार ने इन अलग-अलग तरह के मेल-जोल के बारे में समझाया. उन्होंने कहा, “हमारा रुख साफ है. हम सिर्फ तमिलनाडु की भलाई और विकास के लिए ही झुकते हैं. आज सरकारी कार्यक्रम था और कल राहुल के साथ राजनीतिक बैठक थी, जिसमें उनकी दोस्ती दिखी.”
मोदी ने भी सुलह वाला रुख अपनाया और तमिलनाडु के अलग-अलग मुख्यमंत्रियों – जैसे स्वर्गीय जे. जयललिता, एडप्पादी के. पलानीस्वामी और एम. के. स्टालिन – के साथ अपने कामकाजी रिश्तों का ज़िक्र किया.उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के तौर पर मैंने जयललिता, EPS और स्टालिन के साथ काम किया है। सरकारें बदलने के बावजूद, तमिलनाडु के विकास के लिए काम करने का मेरा संकल्प जारी है और अब मैं मुख्यमंत्री विजय के साथ काम कर रहा हूं.”
फिर भी, सहयोग के बावजूद विजय की मांगों पर कोई साफ वादा नहीं किया गया. मोदी को सौंपी गई एक लिस्ट में, मुख्यमंत्री ने रोके गए फंड को बिना किसी शर्त के जारी करने, तीन हाईवे को छह-लेन का बनाने, मद्रास हाई कोर्ट में तमिल को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने, चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण को मंजूरी देने, मदुरै और कोयंबटूर के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स और होसुर व बोम्मासंद्रा के बीच इंटर-स्टेट मेट्रो लिंक बनाने की मांग की. मोदी ने इन मांगों पर कोई ठोस वादा नहीं किया.
WATCH LIVE: PM Narendra Modi holds Roadshow in Chennai | Tamil Nadu | CM Vijay https://t.co/mqxwCBR3do
— ANI (@ANI) October 11, 2026
…पर आसान नहीं है ये राह
राजनीतिक दांव-पेच सिर्फ सरकार चलाने तक ही सीमित नहीं हैं. कांग्रेस-DMK गठबंधन ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु में जबरदस्त जीत हासिल की थी. 2029 में TVK-कांग्रेस की साझेदारी इस समीकरण को बदल सकती है और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को मजबूत कर सकती है. विजय की सरकार के लिए AIADMK का समर्थन हासिल करने की BJP की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं, क्योंकि विजय ने इसके बजाय कांग्रेस के साथ सत्ता में हिस्सेदारी करने का फैसला किया.
विजय के लिए चुनौती यह है कि वे कांग्रेस की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को भी साथ लेकर चलें, अपने लिए दूसरे रास्ते भी खुले रखें और प्रधानमंत्री के साथ कामकाज के अच्छे संबंध बनाए रखें—जबकि वे प्रधानमंत्री को एक ऐसी विचारधारा का नेतृत्व करने वाला मानते हैं जो उनकी अपनी विचारधारा की विरोधी है.
मेट्रो की सवारी और कैफे में हुई मुलाकात के मकसद अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन ये दोनों ही बातें विजय के उस संतुलन बनाने के प्रयास को दिखाती हैं, जिसके ज़रिए वे तमिलनाडु का कामकाज संभाल रहे हैं, अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक चुनौती पेश करने की स्थिति में खुद को तैयार कर रहे हैं.
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