
Shardiya Navratri 2026: रविवार 11 अक्टूबर 2026 से देवी दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहा है. इस वर्ष माता रानी का आगमन गज (हाथी) की सवारी पर हो रहा है, जो देश में धन-धान्य, वर्षा और समृद्धि का प्रबल संकेत है.
शारदीय नवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ महासंयोग
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर – जोधपुर) के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों की होगी.
- प्रमुख योग: नवरात्रि के पहले दिन सूर्योदय के समय हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का प्रभाव रहेगा.
- गजकेसरी योग: गुरु और चंद्रमा के केंद्र संबंध से दुर्लभ गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है.
- शनि की स्थिति: शनि देव मीन राशि में विराजमान हैं, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है.
- शुभ मुहूर्त शृंखला: इस दौरान अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग रहेगा. इन योगों में भूमि, भवन, वाहन क्रय करना और नए कार्य शुरू करना अति शुभ फलदायी होता है.
हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी: जानें क्या होगा असर
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत के दिन (वार) के आधार पर मां दुर्गा का वाहन तय होता है.
आगमन का वाहन: इस बार नवरात्रि का आरंभ रविवार से हो रहा है, इसलिए देवी का वाहन हाथी होगा.
प्रभाव: देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब माता हाथी पर सवार होकर आती हैं तो प्रचुर वर्षा के योग बनते हैं. खेती अच्छी होती है, अन्न-धन के भंडार भरते हैं और देश में आर्थिक व बौद्धिक संपन्नता आती है.
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त: 11 अक्टूबर 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ 10 अक्टूबर को रात 09:19 बजे से होकर 11 अक्टूबर को रात 09:30 बजे समाप्त होगा. उदयातिथि के अनुसार घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी.
शास्त्रों में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के शुरुआती दो चरणों को छोड़कर कलश स्थापना का विधान है:
- लाभ-अमृत चौघड़िया: प्रातः 10:04 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
- द्विस्वभाव (धनु) लग्न: प्रातः 11:32 बजे से दोपहर 01:36 बजे तक
शारदीय नवरात्रि 2026: संपूर्ण पूजन तिथियां
11 अक्टूबर: मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
12 अक्टूबर: मां ब्रह्मचारिणी पूजा
13 अक्टूबर: मां चंद्रघंटा पूजा
14 अक्टूबर: मां कूष्मांडा पूजा
15 अक्टूबर: मां स्कंदमाता पूजा
16 अक्टूबर: मां कात्यायनी पूजा
17 अक्टूबर: मां कालरात्रि पूजा
18 अक्टूबर: मां महागौरी पूजा
19 अक्टूबर: मां सिद्धिदात्री पूजा
कलश स्थापना विधि और आवश्यक सामग्री
आवश्यक पूजन सामग्री:
मिट्टी का चौड़ा पात्र, साफ मिट्टी, जौ, तांबे या मिट्टी का कलश, गंगाजल, कलावा (मौली), रोली, अक्षत, सुपारी, सिक्का, आम या अशोक के 5 पत्ते, नारियल, लाल चुनरी, फल-फूल, धूप-दीप और श्रृंगार सामग्री.
सरल पूजन विधि:
- प्रतिपदा के दिन प्रातः स्नानादि के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें.
- भगवान श्री गणेश का स्मरण कर अखंड दीप प्रज्वलित करें.
- मिट्टी के पात्र में मिट्टी बिछाकर उसमें जौ बोएं.
- तांबे के कलश पर स्वास्तिक बनाएं और कंठ पर मौली बांधें. कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, दूब और अक्षत डालें.
- कलश के मुख पर 5 आम या अशोक के पत्ते लगाएं.
- एक जटाधारी नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर मौली बांधें और उसे कलश के ऊपर स्थापित करें.
- अब इस पूरे कलश को जौ वाले पात्र के मध्य स्थापित कर नवरात्रि व्रत का संकल्प लें.
Shardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, जानें घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त और 9 दिनों की तिथियां
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