

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 2.6% गिर गए. इससे कंपनी के मार्केट कैप में करीब 5 बिलियन डॉलर की कमी आई. एलन मस्क की स्टारलिंक को भारत में कारोबार करने से रोके जाने संबंधी टिप्पणी के बाद रिलायंस के शेयरों पर दबाव देखने को मिला. हालांकि, बाजार में गिरावट के पीछे दूसरे कारण भी थे. निफ्टी 50 में करीब 9% हिस्सेदारी रखने वाली रिलायंस के शेयरों में गिरावट का असर बेंचमार्क इंडेक्स पर भी पड़ा. बुधवार को 22,603 पर बंद हुआ निफ्टी गुरुवार को करीब 384 अंक यानी 1.7% टूट गया. रिलायंस की गिरावट से इंडेक्स को करीब 53 अंकों का नुकसान हुआ. यानी निफ्टी की कुल गिरावट में रिलायंस का योगदान लगभग सातवां हिस्सा रहा.
मस्क ने क्या कहा था?
एलन मस्क ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि भारत में कुछ ‘ओलिगार्क’ यानी बेहद प्रभावशाली कारोबारी स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं, ताकि भारतीय लोगों पर उनका एकाधिकार बना रहे.
मस्क ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कुछ ओलिगार्क भारत में स्टारलिंक को रोक रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं’ और इसे भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध बताया.
हालांकि, मस्क ने अपनी पोस्ट में किसी कारोबारी या कंपनी का नाम नहीं लिया. इसके बावजूद उनकी टिप्पणी को भारत के टेलीकॉम कारोबार और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा गया.
भारत के संचार मंत्रालय ने भेदभावपूर्ण नियामकीय व्यवस्था के आरोपों को निराधार और गलतफहमी पर आधारित बताया. स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट सेवा और भारती समूह समर्थित वनवेब के पास लाइसेंस हैं, लेकिन इन सभी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियों की प्रक्रिया भी पूरी करनी है. सुनील भारती मित्तल ने कहा कि वनवेब अपनी मंजूरियों का इंतजार कर रही है, जबकि आकाश अंबानी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
जियो की संभावित लिस्टिंग के बीच क्यों अहम है मामला?
ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने डिजिटल कारोबार जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग की तैयारी कर रही है. जियो की लिस्टिंग को भारतीय बाजार के बड़े संभावित IPO में गिना जा रहा है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के लिए करीब 114 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर विचार किया जा रहा है. ये मूल्यांकन जून में ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल किए जाने के समय चर्चा में रहे 130 अरब से 170 अरब डॉलर के दायरे से कम है.
ऐसे में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में प्रतिस्पर्धा और स्टारलिंक की संभावित कारोबारी भूमिका पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है. हालांकि, मस्क की पोस्ट और रिलायंस के शेयरों में गिरावट का समय एक जैसा होने से ये साबित नहीं होता कि शेयर में पूरी गिरावट सिर्फ इसी वजह से आई.
गुरुवार को बाजार पर रिजर्व बैंक की ब्याज दर बढ़ाने की कार्रवाई, करीब 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी दबाव था.
जियो और एयरटेल के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती
भारत के ब्रॉडबैंड बाजार में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल की मजबूत मौजूदगी है. दोनों कंपनियां मिलकर देश के 80% से अधिक ब्रॉडबैंड यूजर्स को सेवाएं देती हैं.
स्टारलिंक की संभावित एंट्री इसलिए अहम है, क्योंकि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड दूरदराज के इलाकों और उन जगहों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. एंटरप्राइज कनेक्टिविटी और दूसरी डिजिटल सेवाओं में भी इस तकनीक की संभावनाएं हैं.
हालांकि, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड और पारंपरिक मोबाइल या फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं के कारोबारी मॉडल और लागत अलग-अलग हैं. इसलिए स्टारलिंक की एंट्री का भारतीय टेलीकॉम कंपनियों पर कितना असर होगा, ये लाइसेंस, सुरक्षा मंजूरी, कीमतों और सेवा विस्तार जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगा.
भारती एयरटेल के शेयर भी गुरुवार को करीब 2.1% गिर गए. एयरटेल की सैटेलाइट कनेक्टिविटी से जुड़ी मौजूदगी वनवेब के जरिए है. हालांकि, एयरटेल के शेयरों में गिरावट को केवल मस्क की टिप्पणी से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि बाजार में व्यापक बिकवाली भी देखने को मिली.
मार्केट कैप में बड़ी गिरावट
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैप के साथ प्रमोटर हिस्सेदारी के बाजार मूल्य पर भी पड़ा. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस में 50.07% प्रमोटर हिस्सेदारी के आधार पर गुरुवार की गिरावट से अंबानी परिवार की हिस्सेदारी के बाजार मूल्य में करीब 21,200 करोड़ रुपये की कमी आई. बता दें कि ये बाजार मूल्य में बदलाव है, न कि फैमिली को हुई वास्तविक नुकसान. शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव के साथ हिस्सेदारी का बाजार मूल्य भी बदलता रहता है.
गुरुवार को बिकवाली सिर्फ रिलायंस तक सीमित नहीं रही. आईटीसी, टाइटन, पावर ग्रिड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडिगो समेत कई प्रमुख शेयर प्रतिशत के लिहाज से रिलायंस से ज्यादा गिरे.इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक दबाव था. निफ्टी में रिलायंस की बड़ी हिस्सेदारी के कारण उसके शेयरों की गिरावट का असर इंडेक्स पर ज्यादा दिखा.





