

नई दिल्ली:
Nana Patekar Death: 8 अक्तूबर 2026 का दिन वो मनहूस खबर लेकर आया जिसे कोई भी सिनेमा प्रेमी सुनना नहीं चाहेगा. नाना पाटेकर ने 75 वर्ष की उम्र में अलविदा कह दिया. सादगी की मिसाल नाना पाटेकर एक्टर होते हुए भी कभी मुंबई के नहीं हुए. सिर्फ वहां काम करते और काम खत्म होते ही अपनी जड़ों को लौट जाते. नाना पाटेकर ने सिनेमा में अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी, खामोशी और अब तक छप्पन मील जैसी सीरियस फिल्में दीं तो वेलकम और हाउसफुल जैसी फुलटू कॉमेडी फिल्में भी दीं. नाना ने दिखाया कि एक एक्टर अगर चाहे तो वह अपनी एक्टिंग से रुला, हंसा और गुस्सा पैदा कर सकता है. लेकिन अब वो नाना नहीं, सिर्फ उनसे जुड़ी यादें रह गई हैं. नाना से मुझे फिल्म के प्रमोशन के दौरान कई बार मिलने का मौका मिला. लेकिन दो इंटरव्यू काफी लंबे रहे और यादगार भी.
नाना पाटेकर के फिटनेस टिप्स
मुझे याद है नाना पाटेकर 2015 के शुरू में अब तक छप्पन 2 का प्रमोशन कर रहे हैं. इसी दौरान हमारे ऑफिस आए तो मुझे भी उनका इंटरव्यू करना था. ऑफिस लगभग खाली हो गया था और शाम के सात बज रहे थे. वही नाना का सादगी भरा अंदाज और गले में गमछा डला हुआ और चेहरे पर मुस्कान. नाना वहीं मेरे पास कुर्सी पर बैठ गए. कोई तकल्लुफ नहीं, कोई ताम-झाम नहीं. अब फिल्म को लेकर बातचीत शुरू हुई. नाना मुस्कराते हुए लेकिन काफी गहराई से जवाब दे रहे थे.
नाना की उम्र उस समय यही 64 साल रही होगी. उनकी फिटनेस कमाल थी और चेहरे पर एक अलग ही चमक. मैंने पूछा नाना इस उम्र में इतना फिट कैसे रहते हैं. नाना ने बहुत ही मजेदार जवाब दिया. अरे करना क्या है. अपनी दिनचर्या का काम करता हूं, थोड़ी-बहुत कसरत करता हूं. कुछ खास रूटीन नहीं है. सिर्फ खुद को फिट रखने के लिए जो करते हैं वो करता हूं. इस जवाब में भी एक सादगी थी. उन्होंने समझाया कि फिटनेस के लिए सिर्फ मेहनत करने की जरूरत है, फिटनेस तो अपने आप बनी रहेगी. वो दौर जब सितारे जिम और फिटनेस इंस्ट्रक्टर के किस्से सुना-सुनाकर दिमाग पका देते हैं, नाना सिर्फ जिंदगी को सही से जीने का सबक सिखा दिया.
नाना पाटेकर से बातचीत
नाना को गुस्सा क्यों आता था?
उनसे एक और मुलाकात का जिक्र करना चाहूंगा जो मेरे लिए सबसे खास है. इस मुलाकात में नाना पाटेकर का पूरा व्यक्तित्व देखने को मिला. उनका गुस्सा देखने को मिला, उनका मजाकिया अंदाज और इसके साथ ही उनकी आंखों में आंसू भी दिखे. दिसंबर 2024 में नाना पाटेकर की फिल्म वनवास का इंटरव्यू फिक्स था. उनके साथ फिल्म के एक उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर भी थे. इंटरव्यू के तय टाइम पर नाना कमरे में पहुंच गए. नाना देखा कि फिल्म के एक्टर पहुंचे नहीं तो एकदम से उन्हें गुस्सा आ गया. जब नाना को गुस्सा आता है तो वो गजब ही लेवल का होता है. किसी तरह वह शांत हुए, लेकिन तब तक उस कमरे में जरूर नाना की वजह से सन्नाटा पसर चुका था. जैसे ही उत्कर्ष और सिमरत की एंट्री हुई तो नाना ने उनको जो डोज दी थी वो उनके समय के पाबंद होने की ओर इशारा करती थी.
माता-पिता पर नाना की सीख
अब इंटरव्यू आगे बढ़ा तो नाना से मैंने उनके परिवार को लेकर सवाल पूछा. बात पूछते ही नाना इमोशनल हो गए. अपने पिता के लिए कुछ ना कर पाने की लाचारगी उनकी आंखों से आंसू बनकर झर-झर बहने लगी. नाना ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने पिता को खोया और वह उस हालत में नहीं थे कि उनके लिए कुछ कर पाते. इसी इमोशनल मूड में नाना ने वहां खड़े एक कैमरामैन से सवा पूछा कि तुम किसके साथ रहते हो और तुम्हारे घर में कौन कौन है? कैमरामैन थोड़ा सकपकाया लेकिन उसने जवाब दिया कि मेरे साथ मेरी मां और बीवी बच्चे रहते हैं. तभी नाना ने उसे टोका, ये कभी नहीं कहना कि तुम्हारी मां तुम्हारे साथ रहती है. हमेशा यह कहो कि तुम अपनी मां के साथ रहते हो. नाना बातों-बातों में वो सीख डाली जो औलाद के लिए बेशकीमती है.
इस तरह इन इंटरव्यू के जरिये मुझे ऐसा नाना देखने को मिले जिन्हें परदे पर महसूस कर पाना मुश्किल था. ये नाना कोई स्टार नहीं थे, ये एक आदमी थे जो एक्टिंग को अपना पेशा मानते थे और उससे इतर अपनी जिंदगी जीते थे. तभी तो हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें किसी एक किरदार या दौर में बांधना मुश्किल है और नाना पाटेकर उन्हीं में से एक रहे हैं. इंटरव्यू के बाद नाना से बात हुई. उन्होंने झप्पी तो दी ही इसके साथ जो पीठ थपथपाने का उनका फेमस अंदाज था, उसने मुलाकात की गर्मजोशी का एहसास कराया. नाना पाटेकर ने कहा कि जल्द ही एक और फिल्म आ रही है मिलते हैं उसके प्रमोशन पर. लेकिन मैं यह नहीं जानता था कि ये नाना से आखिरी मुलाकात साबित होगी…





