
हिमाचल प्रदेश में दृष्टिबाधितों का आंदोलन 1089वें दिन भी जारी रहा. सोमवार (5 अक्टूबर) को दृष्टिहीन संगठन के सदस्यों ने शिमला सचिवालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. संगठन ने आरोप लगाया कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
दृष्टिहीन संगठन के सदस्य राजेश ठाकुर ने कहा कि दिव्यांगजनों को लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि सरकार से निराश होकर अब संगठन ने दिल्ली कूच करने का फैसला लिया है. यदि दोपहर तक सरकार की ओर से मांगों को लेकर कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता है तो आंदोलनकारी दिल्ली के लिए रवाना होंगे.
दिल्ली पहुंचकर राहल गांधी से मुलाकात कर करेंगे घेराव
उन्होंने बताया कि दिल्ली में संगठन के सदस्य कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर घेराव भी करेंगे. इसके अलावा प्रधानमंत्री और दिव्यांगता आयोग के उच्च अधिकारियों के समक्ष भी अपनी मांगें रखी जाएंगी. संगठन की प्रमुख मांगों में दिव्यांगजनों के लिए चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर भर्ती मेला आयोजित करना, वर्तमान 1700 रुपये मासिक पेंशन को बढ़ाकर 5000 रुपये करना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और बीपीएल श्रेणी में बिना शर्त दिव्यांगजनों को शामिल करना शामिल है.
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बीते तीन वर्षों से दिव्यांगजनों की मांगों पर की जा रही अनदेखी
राजेश ठाकुर ने कहा कि पिछले करीब तीन वर्षों से दिव्यांगजनों की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने सरकार से संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा. दृष्टिबाधित युवाओं के लिए विभिन्न सरकारी विभागों में आरक्षित करीब 1100 बैकलॉग पद वर्षों से खाली पड़े हैं. इन पदों को भरने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई. दृष्टिबाधित 1089 दिनों से अपनी मांगो को लेकर आंदोलनरत हैं.
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