

उत्तर कोरिया ने फिर एक मिसाइल टेस्ट किया है. मगर, ये मिसाइल खास है. नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया की रविवार की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिसाइल ने अपने रास्ते (ट्रैजेक्टरी) को बदलने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया. किम की प्रभावशाली बहन ने कहा कि AI तकनीक का मतलब है कि मिसाइल कम ऊंचाई पर ही अपनी उड़ान का रास्ता बदलने में सक्षम है और उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब है कि हमले से बचने का कोई तरीका नहीं है.
क्या सचमुच नहीं बचा जा सकता?
सियोल की सेना ने किम की बहन के उस दावे को गलत बताया कि AI से गाइडेड मिसाइल से बचा नहीं जा सकता. सेना का कहना है कि शनिवार को लॉन्च की गई मिसाइल को रोका जा सकता है. सियोल के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दक्षिण कोरिया और अमेरिका मिलकर मजबूत रक्षा स्थिति बनाए हुए हैं. उनका मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा हाल ही में लॉन्च की गई मिसाइल, दोनों सहयोगियों के रक्षा सिस्टम की पहचान करने और उसे रोकने की क्षमता के दायरे में है. हम उत्तर कोरिया से अपील करते हैं कि वह कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों को तुरंत बंद करे.” साथ ही, यह भी कहा गया कि यह लॉन्च संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है.
एक्सपर्ट ने माना सटीक है मिसाइल
KCNA की रिपोर्ट में उस सटीक जगह (कोऑर्डिनेट्स) का खुलासा किया गया, जहां मिसाइल ने अपने लक्ष्य को भेदा. विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बारीकी से जानकारी देना किम के आत्मविश्वास को दिखाता है. कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के होंग मिन ने AFP को बताया, “इस बार उत्तर कोरिया ने दशमलव बिंदु तक सटीक कोऑर्डिनेट्स बताए हैं — यानी लगभग 30 सेंटीमीटर की सटीकता. इससे किम का यह रुख पता चलता है कि छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और यह उनके आत्मविश्वास को भी दिखाता है.”
किसकी बढ़ी टेंशन
इस मिसाइल की रेंज नॉर्थ कोरिया ने 1,000 किलोमीटर बताई है. वहीं, दक्षिण कोरिया ने इसे 700 किलोमीटर बताया है. अगर मिसाइल की रेंज को 700 किलोमीटर भी मान लें और अगर इसकी सटीकता एक्सपर्ट के बताए अनुसार 30 सेंटीमीटर तक है तो पूरा जापान और साउथ कोरिया अब किम के दायरे में है. किम जब चाहे, जहां चाहे जापान और साउथ कोरिया में मिसाइल दाग सकते हैं. हालांकि, दोनों ही देश तकनीक के मामले में खुद बहुत आगे हैं. इसके साथ ही दोनों को अमेरिका की हर तकनीक मिलती है, ऐसे में ये कहना सही नहीं होगा कि साउथ कोरिया और जापान पूरी तरह अनसेफ हो गए हैं, मगर ये तो जरूर है कि इन देशों पर खतरा पहले के मुकाबले अब कई गुणा ज्यादा बढ़ गया है.
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