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पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट तय करेगा सीमा, विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी कपूर और आराध्या बच्चन के मामले पहले


बॉलीवुड सितारों और मशहूर लोगों के नाम, फोटो और पहचान के इस्तेमाल को लेकर बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स की सीमा तय करने की कवायद शुरू कर दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल बड़ी संख्या में मामलों को एक साथ सुनने के बजाय तीन चुनिंदा मामलों से इस अधिकार के दायरे को समझा जाएगा.

विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी कपूर और आराध्या के मामले पहले

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि कोर्ट पहले अभिनेता विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी कपूर और अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या बच्चन से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगा. बाकी मामलों को बाद में लिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि एक साथ बड़ी संख्या में याचिकाओं पर सुनवाई करने से मामला और उलझ सकता है. इसलिए पहले कुछ मामलों के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि आखिर पर्सनैलिटी राइट्स की असली सीमा क्या है और इसमें क्या-क्या शामिल किया जा सकता है.

‘मुझे अभी साफ तस्वीर दिखाई नहीं दे रही’- हाई कोर्ट

जस्टिस भंभानी ने पर्सनैलिटी राइट्स की स्थिति समझाने के लिए बेहद दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि उनके सामने अभी मिट्टी या लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा है लेकिन उसमें कोई साफ डिजाइन या तस्वीर नजर नहीं आ रही. कोर्ट उन हिस्सों को हटाकर ये समझने की कोशिश करेगा कि वास्तव में पर्सनैलिटी राइट्स का हिस्सा क्या है. कोर्ट के मुताबिक, इन मामलों की सुनवाई के दौरान धीरे-धीरे तस्वीर साफ होगी और आगे आने वाले मामलों में इसी आधार पर इसकी सीमा को और स्पष्ट किया जा सकेगा.

कोर्ट ने पूछा कि क्या सभी फैंस पर ही रोक लगा दें 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फैन पेज और फैन अकाउंट को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में अहम सवाल भी उठाया. कोर्ट ने कहा क्या हमें सभी फैंस पर ही रोक लगा देनी चाहिए. किसी सेलिब्रिटी का कोई फैन नहीं होगा तो समस्या भी नहीं होगी. कोर्ट की ये टिप्पणी उन मामलों के संदर्भ में आई, जिनमें सेलिब्रिटीज की ओर से फैन अकाउंट और फैन पेज हटाने की मांग की गई है.

फैन पेज पर पूरी रोक से कोर्ट पहले ही कर चुका है इनकार

जाह्नवी कपूर के मामले में 11 अगस्त को हाईकोर्ट ने ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया था जो प्रथम दृष्टया अश्लील, पोर्नोग्राफिक या आपत्तिजनक था और जाह्नवी की पहचान का इस्तेमाल कर सीधे कमाई करता दिखाई दे रहा था. हालांकि, कोर्ट ने सभी फैन पेज को एक साथ बंद करने का आदेश देने से इनकार किया था. कोर्ट ने माना था कि इस तरह का व्यापक आदेश अभिव्यक्ति की आजादी पर असर डाल सकता है.

सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर और आम व्यक्ति क्या सबके लिए नियम एक जैसे

कोर्ट ने इस मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी गौतम भाटिया और रोहन अल्वा से भी पूछा कि सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और दूसरे लोगों के पर्सनैलिटी राइट्स के मामलों को क्या एक ही नजर से देखा जा सकता है. गौतम भाटिया ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दावा किस आधार पर किया गया है. अगर मामला किसी व्यक्ति की पहचान और उसके कमर्शियल इस्तेमाल से जुड़ा है तो उसकी पहचान कितनी आसानी से पहचानी जाती है, ये अहम होगा. वहीं मामला निजता, मानहानि या सम्मान से जुड़ा हो तो स्थिति अलग हो सकती है.

30 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

कोर्ट ने साफ किया कि वो सभी मामलों को एक साथ लेकर नहीं चलेगा. पहले चुने गए तीन मामलों से कानूनी तस्वीर साफ करने की कोशिश होगी. दिल्ली हाईकोर्ट अब इस मामले में 30 सितंबर को सुनवाई करेगा. आने वाली सुनवाई में यह सवाल अहम रहेगा कि डिजिटल दौर में किसी मशहूर व्यक्ति के नाम, फोटो, आवाज, पहचान और फैन अकाउंट के इस्तेमाल की कानूनी सीमा आखिर कहां तक है.



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