
Ramlila 2026: रामलीला के मंच पर इस बार सिर्फ रामकथा, संवाद और पारंपरिक भजन ही नहीं सुनाई देंगे. दिल्ली की कई रामलीला कमेटियां Gen-Z को जोड़ने के लिए भजन क्लबिंग, भजन जैमिंग, हाईटेक लाइट-साउंड और सोशल मीडिया जैसे नए प्रयोग करने जा रही हैं. रामलीला शुरू होने में अभी समय है, लेकिन इसकी तैयारियों में यह बदलाव साफ दिखाई देने लगा है.
दिल्ली में इस साल रामलीलाओं का आयोजन मुख्य रूप से 11 अक्टूबर से शुरू होगा. कई बड़े आयोजनों ने युवाओं के लिए अलग कार्यक्रम तैयार किए हैं. कहीं भजन जैमिंग होगी तो कहीं आधुनिक म्यूजिक और लाइट के साथ धार्मिक प्रस्तुतियां होंगी.
लालकिला मैदान से लेकर दिल्ली के दूसरे हिस्सों तक आयोजक इस बार खास तौर पर युवा दर्शकों पर ध्यान दे रहे हैं.
रामलीला में क्या है भजन क्लबिंग?
नाम सुनकर इसे सामान्य क्लबिंग समझना ठीक नहीं होगा. भजन क्लबिंग में भक्ति गीत और भजन ही गाए जाते हैं, लेकिन उन्हें पेश करने का अंदाज किसी लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट जैसा होता है. तेज और साफ साउंड, लाइव बैंड, गिटार, ड्रम, लाइटिंग और कई बार इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का इस्तेमाल होता है.
लोग सिर्फ बैठकर भजन नहीं सुनते. वे साथ गाते हैं, ताली बजाते हैं और कई जगह भजनों पर झूमते भी हैं. ऐसे कार्यक्रम आम तौर पर शराब और नशे से दूर धार्मिक-संगीत आयोजन के रूप में पेश किए जाते हैं. यानी भजन वही हैं, लेकिन उनका मंच और presentation बदल गया है.
रामलीला समितियां Gen-Z को क्यों जोड़ना चाहती हैं?
इसके पीछे एक सीधी वजह है. रामलीला की परंपरा बहुत पुरानी है, लेकिन आज के युवा का मनोरंजन और कंटेंट देखने का तरीका बदल चुका है.
मोबाइल, Instagram Reels, YouTube और लाइव कॉन्सर्ट के बीच पली पीढ़ी लंबे समय तक एक ही तरह की प्रस्तुति देखने की आदी नहीं है. इसलिए आयोजक रामकथा को बदले बिना उसके आसपास का अनुभव बदल रहे हैं.
दिल्ली की श्री धार्मिक लीला कमेटी अपनी 103 साल पुरानी रामलीला में भी आधुनिक मंच तकनीक और नए सांस्कृतिक कार्यक्रम जोड़ने की तैयारी कर रही है. आयोजकों का कहना है कि मकसद युवाओं को भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराना है.
लव कुश रामलीला में भी इस बार हाईटेक डिजिटल मंच और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की तैयारी है. वहीं Gen-Z के युवाओं को तुलसी के पौधे बांटने जैसी पहल भी की जा रही है.
11 अक्टूबर को भजन जैमिंग भी
दिल्ली की रामलीलाओं में यह प्रयोग केवल योजना तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक नव श्री धार्मिक लीला कमेटी ने 11 अक्टूबर को भजन जैमिंग का कार्यक्रम रखा है. कुछ दूसरे आयोजनों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा-केंद्रित गतिविधियां जोड़ी जा रही हैं.
इसलिए इस बार रामलीला मैदान में परिवार के साथ आने वाले पारंपरिक दर्शकों के अलावा कॉलेज जाने वाले युवाओं को भी खींचने की कोशिश दिखाई दे सकती है.
अचानक इतना लोकप्रिय कैसे हुआ भजन क्लबिंग?
असल में यह ट्रेंड रामलीला से शुरू नहीं हुआ. पिछले कुछ समय में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और दूसरे शहरों में भजन और कीर्तन को कॉन्सर्ट जैसी सेटिंग में पेश करने वाले कार्यक्रम युवाओं के बीच चर्चा में आए हैं. इनमें लोग किसी सामान्य म्यूजिक कॉन्सर्ट की तरह इकट्ठा होते हैं, लेकिन मंच से भक्ति संगीत सुनाई देता है.
युवाओं के लिए यहां संगीत है, दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका है और सोशल experience भी है. फर्क इतना है कि केंद्र में भक्ति संगीत रहता है. अब रामलीला आयोजक इसी format को अपने कार्यक्रमों में जगह दे रहे हैं.
भक्ति का नया रूप या सिर्फ नया पैकेज?
भजन क्लबिंग को लेकर एक सवाल भी लगातार उठ रहा है कि क्या इससे युवा वास्तव में अध्यात्म और परंपरा के करीब आते हैं या भक्ति भी एक social-media trend बनकर रह जाएगी?
इस पर कलाकारों और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजकों की राय भी अलग-अलग है. कुछ इसे समय के साथ भक्ति संगीत की प्रस्तुति में स्वाभाविक बदलाव मानते हैं, जबकि कुछ लोगों को डर है कि बहुत ज्यादा कॉन्सर्ट जैसी प्रस्तुति भजन के मूल भाव को पीछे कर सकती है.
लेकिन रामलीला में हो रहा मौजूदा प्रयोग एक बात जरूर दिखाता है कि आयोजक अब यह मान रहे हैं कि नई पीढ़ी को सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि वह परंपरा से जुड़े.
परंपरा को उसके सामने उस भाषा और उस अनुभव में भी लाना होगा, जिससे वह पहले से परिचित है. रामकथा वही है. भगवान राम के आदर्श भी वही हैं. बदल रहा है तो उन्हें Gen-Z तक पहुंचाने का तरीका.
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