
सूर्य संक्रांति – हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के अलावा हर महीने की संक्रांति पर पितरों के लिए तर्पण और दान किया जा सकता है. विशेष रूप से मकर संक्रांति पर. मान्यता है इससे पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है.

गंगा दशहरा – ज्येष्ठ शुक्ल दशमी यानी गंगा दशहरा पर गंगा स्नान और पितरों को श्राद्धांजलि का महत्व है. मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किया दान 10 तरह के पाप कर्मों से मुक्ति दिलाता है.

अक्षय तृतीया – वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया वैसे तो मां लक्ष्मी की पूजा और सोना-चांदी आदि की खरीदारी के लिए खास है लेकिन इस दिन पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान भी किया जाता है.

भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा – को प्रोष्ठपदी पूर्णिमा या श्राद्धि पूर्णिमा कहा जाता है. ये पितृ पक्ष शुरू होने से एक दिन पहले किया जाता है. हेमाद्रि और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा पर प्रपितामह से आगे के तीन पितरों के निमित्त श्राद्ध का विधान बताया गया है. इसके अलावा भी माह की हर पूर्णिमा पितरों के निमित्त दान की परंपरा है.

मृत्यु तिथि (वार्षिक श्राद्ध) – परिवार में जिन पूर्वजों का निधन हो चुका है, उनकी हिंदू तिथि के अनुसार हर वर्ष श्राद्ध किया जाता है. इसे एकोदिष्ट या वार्षिक श्राद्ध की परंपरा से जोड़ा जाता है.
Published at : 28 Sep 2026 09:59 AM (IST)
