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IAS का सपना छोड़ बेटा बना किसान, हर साल होती है 3 से 4 करोड़ की कमाई; पिता ने गुस्से में दी थी बंजर जमीन | Richest Farmer Sudhanshu kumar Samastipur Bihar 3 to 4 crore Turnover year Agriculture Technology


बिहार के समस्तीपुर का गांव ‘नया नगर’, जहां खेती मजबूरी नहीं, बल्कि करोड़पति बनने का जरिया है. यह कहानी है सुधांशु कुमार की, जिन्होंने मिट्टी से सोना उगाने की ठानी और आज 3 से 4 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर खड़ा कर दिया है. उनका लक्ष्य अब इसे 10 करोड़ तक पहुंचाने का है. जहां सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहां सुधांशु अपनी सूझबूझ से आय को 10 गुना बढ़ा चुके हैं.

जब पिता ने ‘फेल’ करने के लिए थमाई बंजर जमीन

कहानी की शुरुआत दिलचस्प है. पिता चाहते थे कि सुधांशु पढ़-लिखकर आईएएस (IAS) अफसर बनें. जब सुधांशु ने गांव लौटकर खेती करने की जिद की, तो पिता बेहद नाराज हुए. उन्होंने बेटे का इरादा तोड़ने के लिए एक बदहाल, उजड़ा हुआ 18 बीघे का आम का बगीचा सौंप दिया, जिससे साल में बमुश्किल 15,000 रुपये आते थे. सोचा था कि बेटा दो-तीन महीने में तंग आकर भाग खड़ा होगा.

लेकिन सुधांशु तो ठान कर आए थे. उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय की मदद ली, वैज्ञानिक तरीका अपनाया और पहले ही साल 1990 में उस बगीचे से रिकॉर्ड 13,35,000 रुपये की कमाई करके सबको चौंका दिया. 

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पारंपरिक खेती से आगे: जब बदला रास्ता

सुधांशु ने शुरुआत पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, मक्का और गन्ने से की थी. जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि गेहूं-मक्का से किसान सिर्फ गुजारा ही रह सकता है. बिहार में गेहूं से ज्यादा से ज्यादा 35,000 और मक्के से 42,000 रुपये प्रति एकड़ ही बचते हैं.

यहीं से उन्होंने लीक से हटकर बागवानी का रुख किया. आम के बाद लीची लगाई, फिर केले, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट का नंबर आया. स्ट्रॉबेरी में कदम रखते ही आमदनी सीधे 4 लाख रुपये तक पहुंच गई. आज उनके बाग में डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं.

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हाईटेक खेती: खेत में फाइबर ऑप्टिक और 72 कैमरे

सुधांशु की खेती सिर्फ जमीन जोतना नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता ‘टेक्नो लैब’ है. उनके दादाजी ने 1952 में पहला कैटरपिलर ट्रैक्टर खरीदा था और उनके पिता ने 1970 के दशक में सीड प्रोसेसिंग प्लांट लगाया था. इसी प्रगतिशील सोच को आगे बढ़ाते हुए सुधांशु ने अपने खेतों को घर से ब्रॉडबैंड और फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए जोड़ दिया है.

खेतों की सुरक्षा और निगरानी के लिए 70 से 72 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगे हैं, जिसे वे दुनिया में कहीं से भी अपने मोबाइल पर देख सकते हैं. इतना ही नहीं, खेत में सिम-बेस्ड वेदर स्टेशन और सॉइल सेंसर्स लगे हैं, जो हर घंटे मौसम और मिट्टी की नमी का सीधा अपडेट उनके मोबाइल पर भेजते हैं.

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गेम चेंजर बनी ‘माइक्रो इरिगेशन’ तकनीक

सुधांशु की कामयाबी का सबसे बड़ा राज है माइक्रो इरिगेशन (टपक सिंचाई). लीची जैसे संवेदनशील फल को बचाने के लिए उन्होंने ड्रिप और माइक्रो-स्प्रिंकलर का जाल बिछाया. आज उनके 70 एकड़ के केले के खेत में नॉर्थ इंडिया का पहला सेंट्रलाइज्ड ऑटोमेटेड इरिगेशन सिस्टम लगा है. अब लेबर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं, बस कंट्रोल रूम से एक बटन दबाया और पूरे खेत को नाप-तौल कर पानी और खाद मिल गई.

किसानों के लिए सुधांशु के 2 सुनहरे टिप्स:

  • बिना कटीली तार (बाड़बंदी) के बागवानी की सोचना भी मत.
  • बिना माइक्रो इरिगेशन के खेती करने की भूल कभी मत करना.
    Richest Farmer Sudhanshu kumar Samastipur Bihar 3 to 4 crore Turnover year Agriculture Technology

आज उनके इस मॉडल को देखने के लिए देश-विदेश से 12,000 से अधिक लोग आ चुके हैं. पढ़ाई और तकनीक के इस अनूठे तालमेल ने समस्तीपुर के इस ‘एग्रीक्रेट’ को आज खेती का असली सिकंदर बना दिया है.

लीक से हटकर हॉर्टिकल्चर (बागवानी) और प्रीमियम फलों की खेती का रुख किया. आज उनके बागों में करीब डेढ़ लाख पौधे लहलहा रहे हैं. 

  • केला (जैन इरीगेशन वैरायटी): एक लाख पौधे (70 एकड़ में फैले, जो परंपरागत 14-16 महीने के बजाय सिर्फ 11-12 महीने में शानदार फसल देते हैं)
  • लीची: 1100 पेड़ (हर पेड़ के नीचे वैज्ञानिक सिंचाई की व्यवस्था)
  • आम: 400+ पेड़ (ट्रेडिशनल और कुछ अत्याधुनिक हाई-डेंसिटी वाले)
  • ड्रैगन फ्रूट: 2,000 पौधे (जो बंपर मुनाफा दे रहे हैं)
  • जामुन (बारडोली वैरायटी): 300 पेड़ (अनोखा प्रयोग: पेड़ों की ऊंचाई को प्रूनिंग के जरिए सिर्फ 10 फीट तक रखा गया है ताकि हाथ से फल तोड़े जा सकें)
  • अन्य फल: मौसमी (125 पेड़), अमरूद (300 पेड़), स्ट्रॉबेरी, जापानी माल्टा, किन्नू, प्लम, एवोकैडो, रामबुटान और सेब के प्रायोगिक पौधे.




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