
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने प्रदेशवासियों के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए इसे केवल एक उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने की घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर जनता के विश्वास को चोट पहुंचाने वाला कदम बताया है.
पटवारी ने कहा कि 9 जून को उन्होंने राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी और आशंका जताई थी कि यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जनादेश और संविधान की मर्यादा का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने से उनकी चिंता और गहरी हो गई है. कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या देश और प्रदेश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम कर पा रही हैं और क्या सत्ता की इच्छा तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बीच की दूरी आज भी सुरक्षित है.
जनता के मन मैं स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा हुआ- जीतू
अपने पत्र मैं पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है, बल्कि निष्पक्षता, समान अवसर और कानून के समक्ष समानता का नाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों मैं देश ने निर्वाचित सरकारों के गिरने, जनादेश बदलने और राजनीतिक निष्ठाओं के अचानक बदलने जैसे कई घटनाक्रम देखे हैं, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हुआ है. उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश ने भी सत्ता परिवर्तन और विधायकों के इस्तीफों से जुड़े घटनाक्रम देखे हैं, इसलिए राज्यसभा चुनाव के दौरान बनी परिस्थितियों से जनता के मन मैं स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा हुआ है.
मीनाक्षी नटराजन मामले में कांग्रेस का बड़ा फैसला, बना ली रणनीति, अब सिर्फ EC के फैसले का इंतजार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने संविधान को भारत की आत्मा बताते हुए कहा कि यदि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगें और विपक्ष को बराबरी का अवसर मिलने पर संदेह हो, तो यह किसी एक दल की नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र की हार है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब सबसे ज्यादा कमजोर होता है, जब जनता का विश्वास टूटने लगता है.
पटवारी ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि यह कांग्रेस और बीजेपी के बीच का संघर्ष नहीं, बल्कि सत्ता और संविधान के बीच की लड़ाई है. उन्होंने लोगों से लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. पत्र के अंत मैं उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी संरक्षक कोई संस्था नहीं, बल्कि जनता होती है और जब जनता जागरूक होती है तो इतिहास की दिशा बदल सकती है.
विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर ही लगाए आरोप
उधर, मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर कहा, “कांग्रेस ने खुद ही नामांकन फॉर्म रद्द करवाया. अगर चुनाव होता, तो हम तीसरी सीट भी जीत जाते. खुद कांग्रेस नेताओं ने भी माना था कि बड़े पैमाने पर क्रॉस-वोटिंग होने वाली थी. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के 20 से 25 विधायक क्रॉस-वोटिंग करेंगे. इसी डर से कांग्रेस ने खुद ही फॉर्म रद्द करवा दिया.
सारंग ने कहा कि फॉर्म गलत तरीके से क्यों भरा गया? हलफनामे में ज़रूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई? आपके पास बड़े वकील, कानूनी विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार हैं. आपके पास एक लीगल सेल है. क्या आपको यह नहीं पता था कि हलफनामे में कौन सी जानकारी होनी चाहिए? कांग्रेस को पता था कि अगर चुनाव हुआ, तो कम से कम 25 विधायक क्रॉस-वोटिंग करेंगे. इसलिए, अपनी इज़्ज़त बचाने और अपनी साख बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने खुद ही नामांकन फॉर्म रद्द करवा दिया.”