

कुछ लोगों को अचानक से ऐसा महसूस होता है कि जैसे उनके शरीर पर चींटियां रेंग रही हों या फिर कीड़ा चल रहा हो, लेकिन जब चेक करते हैं तो कुछ भी नहीं होता है. इस तरह के लक्षण अक्सर लोगों को काफी नॉर्मल करता है, लेकिन इसे इग्नोर करना आपकी गलती हो सकती है. जी हां, ये एक सामान्य लक्षण नहीं, बल्कि फॉर्मिकेशन हो सकता है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को असामान्य तंत्रिका संवेदना होने लगती है. ये सिर्फ स्किन से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि कई बार नसों, हार्मोन या मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारियों के संकेत भी हो सकते हैं. यहां डॉ. के.के. जिंदल, डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी, सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली ms जानते हैं इस विषय को अच्छे से –
क्या है फॉर्मिकेशन?
फॉर्मिकेशन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को ऐसा महसूस होता कि उसकी स्किन पर या स्किन के नीचे कुछ छोटे-छोटे कीड़े चल रहे हैं. इस स्थिति में उन्हें झुनझुनी, खुलजी, जलन और सुई चुभने जैसा अनुभव होता है. ये संवेदना उन्हें इतनी ज्यादा रियल लगती है कि वे बार-बार कीड़े या चींटी को हटाने की कोशिश करते हैं और स्किन को खुजलाने लगते हैं.
क्या है इस समस्या का कारण?
डॉक्टर कहते हैं कि शरीर में नसों को नुकसान पहुंचने पर ऐसी असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं. इसके अलावा कुछ अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे-
- डायबिटीज के मरीजों में होने वाली डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण ऐसी परेशानी महसूस हो सकती है.
- शरीर में विटामिन B12 की कमी भी नसों के कामकाज को प्रभावित कर सकती है, इससे स्किन पर चींटियां रेंगने जैसा अनुभव होतचा है.
स्ट्रेस भी हो सकता है जिम्मेदार
डॉक्टर बताते हैं कि सिर्फ शारिरिक स्थिति की वजह से ही नहीं, बल्कि कई बार मानसिक स्थितियों की वजह से भी इस तरह के एहसास होने लगते हैं. काफी ज्यादा तनाव और एंग्जायटी के कारम लोगों में इस तरह के संकेत नजर आते हैं. कई बार यह समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर व्यक्ति की दिनचर्या को भी प्रभावित कर सकती है.
हार्मोनल बदलाव
इतना ही नहीं, इस तरह के लक्षण हार्मोनल बदलाव की वजह से भी हो सकते हैं. मुख्य रूप से महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसी स्थिति महसूस होने लगती है. एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव के कारण स्किन और नसों की संवेदनशीलता बदल सकती है, जिससे फॉर्मिकेशन की शिकायत हो सकती है.
कुछ अन्य बीमारियों से भी हो सकता है कनेक्शन
डॉक्टर बताते हैं कि इन स्थितियों के अलावा कुछ अन्य बीमारियों से भी इसका कनेक्शन हो सकता है, जैसे-
पार्किंसन रोग
मल्टीपल स्क्लेरोसिस
अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां, इत्यादि.
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