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‘जात‍ि प्रमाण की वजह से रद्द नहीं होगा एडम‍िशन’, बॉम्‍बे हाई कोर्ट से छात्रों को बड़ी राहत, द‍िए ये न‍िर्देश | Bombay HC major relief to students said Do not cancel students admission solely on grounds that caste validity is pending



नागपुर: केवल जाति वैधता लंबित होने का कारण बताकर छात्रों का प्रवेश रद्द न करें, ऐसा कहते हुए समय पर आवेदन करने वाले छात्रों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है. मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच द्वारा यह आदेश दिए जाने से कई छात्रों ने राहत की सांस ली है. इस आदेश के अनुसार, अब जाति वैधता प्रमाण पत्र के लिए समय पर आवेदन करने के बाद भी यदि दावा लंबित है, तो छात्रों का प्रवेश रद्द नहीं किया जा सकता. 

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने आदिवासी छात्रों को यह महत्वपूर्ण राहत दी है. कोर्ट ने स्‍पष्‍ट क‍िया क‍ि जाति वैधता का दावा लंबित रहने के दौरान छात्रों की शिक्षा पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. न‍िर्देश द‍िए क‍ि जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समितियों को लंबित दावों पर छह महीने के भीतर निर्णय ले. न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष विभिन्न छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसके बाद यह निर्णय दिया गया है. 

अदालत में दाखि‍ल की थी याच‍िका

नागपुर जिले के अचल रवींद्र श्रीराम ने जाति वैधता प्रमाण पत्र की समय सीमा समाप्त होने से पहले अपना प्रवेश बचाने के लिए अदालत का रुख किया था. जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 8 सितंबर थी। छात्रा ने याचिका में आशंका जताई थी कि समय सीमा के भीतर प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करने पर उसका प्रवेश रद्द हो सकता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के 4 सितंबर 2026 के शासन निर्णय (GR) पर ध्यान दिया. इस शासन निर्णय के अनुसार, कुछ छात्रों को जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने के लिए तीन महीने का विस्तार दिया गया है. हालांकि, अदालत के संज्ञान में लाया गया कि अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को इस समय सीमा विस्तार के लाभ से बाहर रखा गया था.

10 से अधिक मामलों में कोर्ट ने छात्रों को समान राहत प्रदान की

न्यायालय ने पाया कि शासन निर्णय में इस बात का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया था कि अनुसूचित जनजाति के छात्रों को इस विस्तार से क्यों बाहर रखा गया. न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति को संबंधित छात्रा के दावे पर छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तब तक छात्रा का प्रवेश रद्द न किया जाए. हालांकि, छात्रा का प्रवेश जाति वैधता दावे के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा. इसी तरह के दस से अधिक मामलों में उच्च न्यायालय ने छात्रों को समान राहत प्रदान की है. समय पर आवेदन करने के बावजूद समिति द्वारा निर्णय न होने के कारण प्रवेश रद्द होने के डर में जी रहे कई छात्रों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है. 

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