धर्म

अजा एकादशी की पूजा आज, व्रत कल खुलेगा, रात में फलाहार कर सकते हैं या नहीं?


Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी का व्रत आज 7 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है, लेकिन इसका पारण 8 सितंबर की सुबह होगा. ऐसे में दिनभर भूखे रहने वाले कई भक्तों के मन में सवाल है कि क्या शाम की पूजा के बाद फलाहार किया जा सकता है या फल खाने से व्रत टूट जाएगा?

इसका सीधा जवाब व्रत लेते समय किए गए संकल्प पर निर्भर करता है. यदि आपने फलाहारी व्रत का संकल्प लिया है तो रात में फल, दूध या व्रत में स्वीकार की जाने वाली दूसरी सात्विक चीजें ले सकते हैं. इसे अगले दिन होने वाला पारण नहीं माना जाएगा. लेकिन यदि आपने निर्जल या निराहार व्रत रखने का संकल्प लिया है तो रात में फलाहार करने से उस संकल्प का नियम बदल जाएगा.

शाम 5:03 बजे खत्म हो जाएगी एकादशी

पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 7:29 बजे शुरू हुई थी. इसका समापन आज यानी 7 सितंबर को शाम 5:03 बजे होगा. उदया तिथि के कारण अजा एकादशी का व्रत आज रखा जा रहा है.

यहां भक्तों को तिथि समाप्त होने और व्रत का पारण करने के बीच का अंतर समझना जरूरी है. एकादशी तिथि शाम 5:03 बजे समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि इसी समय भोजन करके व्रत खोल दिया जाए. एकादशी व्रत का विधिवत पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है.

दिल्ली के पंचांग के अनुसार अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6:02 से 8:33 बजे के बीच किया जा सकता है. शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार इस समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

क्या रात में फलाहार करने से व्रत टूट जाएगा?

एकादशी का व्रत अलग-अलग तरीकों से रखा जाता है. कुछ लोग निर्जल रहते हैं, कुछ केवल पानी लेते हैं और बड़ी संख्या में भक्त फलाहार करके व्रत रखते हैं. इसलिए रात में फल खाने का नियम सभी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता.

फलाहारी व्रत रखने वाले भक्त शाम को भगवान विष्णु की पूजा और आरती करने के बाद फलाहार कर सकते हैं. फलाहार में अनाज का प्रयोग नहीं होना चाहिए. फल खाने को द्वादशी का पारण नहीं माना जाएगा, क्योंकि व्रत का धार्मिक समापन अगले दिन निर्धारित पारण के समय ही होगा.

यदि किसी ने सुबह स्पष्ट रूप से निर्जल या निराहार रहने का संकल्प लिया था तो उसे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर वही नियम पूरा करना चाहिए. लेकिन कमजोरी, चक्कर, नियमित दवा या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर शरीर की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए. आवश्यकता पड़ने पर जल या फल लिया जा सकता है. धार्मिक परंपरा में व्रत का संबंध श्रद्धा और संयम से है, शरीर को नुकसान पहुंचाने की जिद से नहीं.

रात में कितने बजे फलाहार कर सकते हैं?

फलाहारी व्रत रखने वाले शाम की विष्णु पूजा और आरती के बाद फलाहार कर सकते हैं. इसके लिए एकादशी तिथि समाप्त होने यानी शाम 5:03 बजे का इंतजार करना जरूरी नहीं है. सुविधा के अनुसार सूर्यास्त के बाद या संध्या पूजा पूरी करने के बाद फल लिया जा सकता है.

कुछ परिवारों और वैष्णव परंपराओं में एकादशी पर केवल एक बार फलाहार करने या पूरी रात निराहार रहने का नियम होता है. ऐसे भक्तों को अपनी पारिवारिक या गुरु परंपरा के अनुसार व्रत रखना चाहिए.

फलाहार और पारण में क्या अंतर है?

फलाहार व्रत के दौरान लिया जाने वाला अनुमत आहार है. इसमें फल, दूध और परंपरा के अनुसार व्रत में स्वीकार की जाने वाली सामग्री ली जाती है. इसका उद्देश्य व्रत को समाप्त करना नहीं, बल्कि शरीर की जरूरत के अनुसार सीमित सात्विक आहार लेना है.

पारण व्रत का विधिवत समापन है. यह एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है. पारण के समय भगवान विष्णु की पूजा करके जल, तुलसी या सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है. इसलिए आज रात फल लेने और कल सुबह पारण करने को एक ही बात नहीं माना जाएगा.

रात के फलाहार में क्या ले सकते हैं?

फलाहारी व्रत रखने वाले अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन चीजों का सेवन कर सकते हैं:

  • केला, सेब, अनार या दूसरे मौसमी फल.
  • दूध, दही या दूध से बनी साधारण व्रत सामग्री.
  • मखाना और सूखे मेवे.
  • नारियल पानी या नींबू पानी.
  • उबला आलू और सेंधा नमक.
  • साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बना सात्विक भोजन.

फलाहार हल्का और सीमित मात्रा में रखना चाहिए. व्रत के नाम पर बहुत अधिक तला हुआ भोजन करना व्रत के संयम वाले भाव के विपरीत माना जाता है.

किन चीजों से बचना चाहिए?

एकादशी के दौरान चावल, गेहूं, मैदा, सूजी, बेसन, दाल और दूसरे अनाज नहीं लेने की परंपरा है. साधारण नमक के स्थान पर फलाहार में सेंधा नमक प्रयोग किया जाता है. प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा से भी दूर रहना चाहिए.

बाजार से पैकेट वाला फलाहार खरीदते समय उसका लेबल अवश्य देख लें. कई नमकीन या चिप्स में सामान्य नमक, अनाज का आटा अथवा ऐसे मसाले मिले हो सकते हैं जो व्रत में नहीं लिए जाते.

सुबह पारण कैसे करें?

8 सितंबर को सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें. दीपक जलाकर फल या सात्विक भोग अर्पित करें. इसके बाद निर्धारित समय में जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है. कई परंपराओं में तुलसी युक्त जल से पारण किया जाता है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने के बजाय पहले से रखे तुलसी दल का प्रयोग करना चाहिए.

पारण में बहुत भारी भोजन करने के बजाय हल्का सात्विक भोजन लेना बेहतर रहता है. यदि कोई व्यक्ति 8 सितंबर को भौम प्रदोष का व्रत भी रख रहा है तो उसे अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार अजा एकादशी का पारण करके प्रदोष व्रत शुरू करना चाहिए.

एक पंक्ति में समझें नियम

यदि आपने फलाहारी अजा एकादशी व्रत रखा है तो आज रात पूजा के बाद फल ले सकते हैं. इसे कल सुबह होने वाला पारण नहीं माना जाएगा. निर्जल या निराहार संकल्प लेने वालों के लिए नियम अलग रहेगा. एकादशी का विधिवत पारण 8 सितंबर को द्वादशी तिथि में ही किया जाएगा.

Ganesh Chaturthi: घर और ऑफिस की गणेश स्थापना में क्या है बड़ा अंतर? बप्पा को दफ्तर लाते वक्त ध्यान रखें ये जरूरी बातें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button