
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के अखंड दांपत्य का पर्व माना जाता है. इस बार ये त्योहार 14 सितंबर 2026 को है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं. पूजा में शिव-पार्वती की प्रतिमा या पार्थिव शिवलिंग के ऊपर फूलों और पत्तियों से बना फुलेरा सजाने की परंपरा है.
क्या होता है फुलेरा?
फुलेरा फूलों, पत्तियों से तैयार किया जाने वाला एक तरह का पुष्प मंडप है. इसे शिव-पार्वती की पूजा के ऊपर लगाया जाता है. कई परंपराओं में फुलेरे में पांच फूलों की लड़ियां रखी जाती हैं. इन्हें भगवान शिव की पांच पुत्रियों जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली का प्रतीक माना जाता है.
फुलेरा दान से क्या फल मिलता है?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि जो स्त्रिया हरतालिका तीज का व्रत नहीं कर पाए वो अगर इस दिन शिव मंदिर में फुलेरा दान कर दें तो व्रत फल प्राप्त होता है, मनचाही इच्छा का फल मिलता है.
शिव जी और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है. इसे वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और सौहार्द की कामना से जोड़ा जाता है. विवाहित महिलाएं इसे अखंड सौभाग्य की भावना से अर्पित करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं
शिव पुराण में फूलों की पूजा का क्या महत्व है?
शिव पुराण में भगवान शिव की पूजा में फूलों के महत्व का स्पष्ट वर्णन मिलता है. एक अध्याय में अलग-अलग फूलों से शिव पूजा करने पर अलग-अलग फल बताए गए हैं. इसमें कमल, बिल्वपत्र, धतूरा, अगस्त्य, चमेली, शमी सहित अनेक पुष्प-पत्रों का उल्लेख मिलता है. ग्रंथ में यह भी कहा गया है कि सुंदर फूलों की मालाओं से भगवान शिव की पूजा करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा ऋतु के फूलों से पूजा करने को भी पुण्यकारी बताया गया है.
FAQs
- फुलेरा किसका प्रतीक है?
फुलेरा शिव-पार्वती के दिव्य मिलन और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है. - फुलेरा दान क्यों किया जाता है?
मान्यता है कि इससे शिव-पार्वती का आशीर्वाद और दांपत्य सुख की कामना पूरी होती है. - क्या बिना व्रत फुलेरा दान कर सकते हैं?
हां, श्रद्धा से मंदिर में फुलेरा अर्पित किया जा सकता है. इसे व्रत न कर पाने वालों के लिए एक धार्मिक उपाय माना जाता है. - फुलेरे में पांच फूल क्यों लगाए जाते हैं?
कुछ परंपराओं में पांच पुष्प-लड़ियों को भगवान शिव की पांच पुत्रियों का प्रतीक माना जाता है.
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