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पंजाब टू राजस्थान: सचिन पायलट का ‘मिशन पंजाब’ तय करेगा जयपुर की भावी सियासत! | sachin pilot punjab congress incharge rajasthan politics ashok gehlot



नई दिल्ली:

पंजाब प्रभारी के तौर पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी कांग्रेस नेतृत्व ने सौंपी है. पंजाब कांग्रेस में जारी प्रदेश अध्यक्ष को हटाने को लेकर जारी सियासी घमासान और पंजाब में कांग्रेस की जीत की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट के कंधों पर है. लेकिन सचिन पायलट को दी गई यह ज़िम्मेदारी केवल पंजाब का नतीजा ही नहीं बल्कि आने वाले समय में राजस्थान की सियासी लड़ाई और उनके अपने राजनीतिक दावे पर भी असर डाल सकता है. 

दरअसल बीते दिनों में पूर्व सीएम भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस में सियासी घमासान और लड़ाई को रोक और ठीक नहीं कर पाए और चन्नी कैम्प और बाकी नेताओं ने उनका लगातार प्रदेश में भेदभाव से लेकर कई पहलू पर विरोध किया था. 

भूपेश बघेल बतौर प्रभारी के तौर पर कोशिश कर रहे थे और कई बार उन्होंने प्रदेश के हालातों को कांग्रेस नेतृत्व को रिपोर्ट के माध्यम से बताया भी था लेकिन बात बनी नहीं जिसके बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी पद से भूपेश बघेल को हटा उनको असम का प्रभार दे दिया गया और उनकी जगह सचिन पायलट को पंजाब के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई. 

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पंजाब के गतिरोध को दूर करेंगे पायलट?

सचिन पायलट के प्रभारी बनने के बाद से पंजाब से लेकर राजस्थान तक समर्थकों और नेताओं ने उनको बधाई दी और सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह के ट्वीट भी किए लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा अब यह है कि कैसे पंजाब में जारी गतिरोध को सचिन पायलट दूर करेंगे? क्योंकि आज के वक्त में कांग्रेस के भीतर यह सबसे महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है. 

एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत की चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य नेता पंजाब कांग्रेस के प्रधान को हटाने को लेकर लगातार डटे हुए हैं और दूसरों ओर कुछ दिनों में राहुल गांधी खुद पंजाब जाने वाले हैं, अब सचिन पायलट चुनावी राज्य पंजाब के प्रभारी बनने के बाद कैसे एक साथ सभी नेता नजर आएंगे बिना किसी झगड़े के यह सबसे अहम टास्क होगा.

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राजथान की राजनीति पर क्या असर?

2028 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन उससे पहले कई बार पायलट समर्थक उन्हें सीएम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करनी की मांग को कर चुके हैं. पिछले कुछ सालों में सियासी उठापटक को देखें तो राजस्थान में सीएम की कुर्सी की लड़ाई सचिन पायलट और अशोक गहलोत में कई बार देखने को मिली है. 

चाहे वो सरकार में रहते हुए सरकार को खतरे में लाने की बातें हों या मानेसर वाली घटना ही क्यों ना हो? कई बार पायलट और गहलोत के बीच जुबानी जंग भी भविष्य की राजनीति को लेकर चर्चा में बनी रही है. सचिन पायलट युवा चेहरे के तौर पर कांग्रेस पार्टी में काफी अहम भूमिका निभाते आए हैं. 

वह राजस्थान में तो मजबूत नेता है हीं लेकिन पार्टी उनका इस्तेमाल अन्य चुनावों में भी करती आई है. ऐसे में आने वाले दिनों में सचिन पायलट का बतौर प्रभारी पंजाब में काम करना राजस्थान की सियासी ताकत में भी प्रभाव डाल सकता है. सूत्रों का कहना है कि अगर पंजाब में पायलट की परफॉरमेंस अच्छी रही तो उन्हें अगला टास्क राजस्थान का मिल सकेगा.

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पंजाब टू राजस्थान, कैसे दिखेगा भविष्य में इसका असर? 

पंजाब का बतौर प्रभारी बनने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा पंजाब से लेकर राजस्थान तक बनी हुई है. पंजाब की जीत राजस्थान के सियासी भविष्य को भी सचिन पायलट के लिए तय करेगी. 

सचिन पायलट ने अन्तर्कलह की राजनीति को बहुत करीब से देखा है. वह जिस प्रदेश से आते हैं वहां एक लंबे समय तक गुटबाजी, अंतर्कलह जैसे विवाद लंबे समय तक कांग्रेस में देखने को मिले हैं. सचिन पायलट के आगे पंजाब की जीत सुनिचित करना एक बड़ी चुनौती भी है और जिम्मेदारी भी, क्योंकि पंजाब चुनाव के बाद 2028 में राजस्थान में विधानसभा का चुनाव भी है. 

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई पुरानी सियासी लड़ाई रह चुकी है जिसका कई बार केंद्र दिल्ली भी बना है. सचिन पायलट अगर पंजाब में कांग्रेस की जीत को सुनिश्चित कर पाए तो इसका राजनीतिक असर राजस्थान की सियासत पर भी पड़ेगा. 

राजस्थान के एक सांसद ने ऑफ द रिकॉर्ड इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि सचिन पायलट का यह टास्क आने वाले राजस्थान चुनाव में कांग्रेस की सियासी चाल और उनके खुद के कद पर भी डालेगा. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की पंजाब टू राजस्थान का सियासी सफर सचिन पायलट कैसे तय करते हैं और क्या कुछ देखने को मिलता है?

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