

AIIMS Obesity Summit 2026 : मोटापा आज से समय में लोगों की काफी बड़ी चुनौती हो चुकी है. इसी विषय को लेकर नई दिल्ली एम्स ओबेसिटी समिट 2026 के उद्घाटन के दौरान एम्स के डायरेक्टर डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि एक बार किसी व्यक्ति का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो उसे कम करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है. इतना ही नहीं, वजन घटाने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती होती है. इसलिए मोटापे से बचाव पर ध्यान देना ही सबसे बेहतर तरीका है.
बच्चों से ही शुरू करनी होगी हेल्दी लाइफस्टाइल
डॉ. टंडन का कहना है कि मोटापा सिर्फ जैविक कारणों से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे व्यवहार, खानपान, पारिवारिक आदतें और आसपास का वातावरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. बच्चों में जो खाने और लाइफस्टाइल की आदतें विकसित होती हैं, वही आगे चलकर उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
एक्सपर्ट का मानना है कि जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, बढ़ता स्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या मोटापे के प्रमुख कारण बन रहे हैं. ऐसे में स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम को बचपन से ही जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है.
दक्षिण एशियाई लोगों में कम BMI पर भी बढ़ सकता है खतरा
डॉ. टंडन ने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों में मोटापे का असर कुछ अलग तरह से देखा जाता है. कई बार BMI सामान्य या बहुत ज्यादा न होने के बावजूद शरीर के बीच वाले हिस्से में चर्बी जमा होने लगती है. यह स्थिति डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकती है.
इसी वजह से सिर्फ BMI के आंकड़ों के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का आकलन करना पर्याप्त नहीं है. विशेषज्ञ शरीर में फैट के वितरण और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को भी देखने की सलाह देते हैं.
मोटापा सिर्फ वजन नहीं, कई बीमारियों की जड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापा सिर्फ बढ़ते वजन का मामला नहीं है. ये टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, फैटी लिवर और कई अन्य गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. यही कारण है कि डॉक्टर अब इलाज से ज्यादा रोकथाम पर जोर दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मोटापे के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सही समय पर उठाए गए छोटे कदम भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं.
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