धर्म

सितंबर में अजा और परिवर्तिनी एकादशी कब-कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त


Ekadashi Sepetember 2026: आज के दौर में जब चारों ओर निराशा, असफलता और दुख का सामना करना पड़े तो एकादशी व्रत इन समस्याओं से पार पाने का अचूक उपाय माना गया है. इससे न सिर्फ मानसिक बल्कि आर्थिक, शारीरिक रूप से भी परेशानी दूर होती है. इस साल सितंबर में अजा एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी व्रत किया जाएगा. 

एकादशी इंद्रियों पर नियंत्रण, आहार-संयम, जप, ध्यान और भगवान विष्णु के स्मरण का अवसर है. पुराणों में इसके माहात्म्य को केवल भोजन न करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि मन, वाणी और कर्म को संयमित करने पर भी जोर दिया गया है.

खोई हुई सत्ता, सुख, समृद्धि पाने का व्रत है अजा एकादशी

अजा एकादशी – 7 सितंबर 2026

  • तिथि – 06 सितंबर 2026, रात 19:29 – 7 सितंबर 2026, शाम 05:03
  • व्रत पारण समय – सुबह 6.02 – सुबह 8.33

अजा एकादशी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है. पद्म पुराण में श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को इसके माहात्म्य का वर्णन मिलता है. इसमें इसे पापों का नाश करने वाली एकादशी बताया गया है. इसकी कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है. कठिन परिस्थितियों में सब कुछ खो देने के बावजूद हरिश्चंद्र ने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा. ऋषि गौतम की सलाह पर उन्होंने अजा एकादशी का व्रत किया और कथा के अनुसार उन्हें अपना राज्य, परिवार और प्रतिष्ठा फिर से प्राप्त हुई.

अजा एकादशी के लाभ

  • पाप कर्मों के मुक्ति और आत्मशुद्धि की प्राप्ति.
  • कठिन परिस्थितियों से निकलने और जीवन में दोबारा स्थिरता लाती है.
  • सत्य, संयम और धर्म के पालन की शक्ति बढ़ाने वाला व्रत माना जाता है.
  • अजा एकादशी की कथा सुनने का भी पुण्य बताया गया है, पद्म पुराण में इसके महत्व को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है.

जीवन में बड़ा परिवर्तन लाती है परिवर्तिनी एकादशी

परिवर्तिनी एकादशी – 22 सितंबर 2026

  • तिथि – 21 सितंबर 2026, रात 08:00 – 22 सितंबर 2026, रात 09:43
  • व्रत पारण समय – सुबह 6.10 – सुबह 8.35 (23 सितंबर 2026)

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी है. इसे वामन एकादशी, पार्श्व एकादशी और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है. पुराणों में इसका संबंध भगवान विष्णु के वामन स्वरूप से जोड़ा गया है. परिवर्तिनी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में शयन कर रहे भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं. भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत के पुण्य की तुलना बड़े यज्ञों से की गई है.

परिवर्तिनी एकादशी के लाभ

  • ये व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है
  • वामन भगवान की पूजा से दान, विनम्रता और शरणागति का भाव मजबूत होता है.
  • इसके प्रताप से व्यक्ति अनिष्ट करने से बचता है, आध्यात्मिक उन्नति होने की मान्यता है.

FAQs

1. क्या अजा एकादशी खोई हुई चीजों को वापस पाने का व्रत है?
धार्मिक मान्यता में अजा एकादशी को विपरीत परिस्थितियों से उबरने और जीवन में सुख-समृद्धि लौटने से जोड़ा गया है. 

2. अजा एकादशी की पूजा में राजा हरिश्चंद्र की कथा का क्या संदेश है?
राजा हरिश्चंद्र की कथा बताती है कि संकट कितना भी बड़ा हो, सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए. ये व्रत धैर्य, सत्य और आत्मविश्वास बनाए रखने की धार्मिक प्रेरणा भी देती है.

3. भगवान विष्णु के करवट बदलने से परिवर्तिनी एकादशी का क्या संबंध है?
मान्यता है कि चातुर्मास में योगनिद्रा में विराजमान भगवान विष्णु परिवर्तिनी एकादशी पर करवट बदलते हैं. इसी कारण इस एकादशी को जीवन में ठहराव खत्म होने, परिस्थितियों में बदलाव का प्रतीका है.

4. क्या परिवर्तिनी एकादशी सिर्फ पापों के नाश के लिए ही मानी जाती है?
नहीं. वामन भगवान की पूजा व्यक्ति को अहंकार छोड़कर धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



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