

मध्य प्रदेश की अर्चना शुक्ला को इस साल राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाएगा. अर्चना शुक्ला बच्चों को विज्ञान पढ़ाती हैं. उन्होंने शिक्षा को केवल किताबों और क्लास तक सीमित नहीं रखा. नए-नए तरीकों से बच्चों को पढ़ाया है. उनके कार्यों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता Project-Based Learning (PBL) है. उन्होंने विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़कर पेड़ों की QR कोडिंग, गौरैया संरक्षण, बीज बचाओ–पेड़ बचाओ, पौधों से जुड़ाव, जैसे अनेक प्रोजेक्ट विकसित किए हैं. इन प्रोजेक्ट के माध्यम से छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, समस्या-समाधान क्षमता, नेतृत्व और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित हुई.
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहुंचाए छात्र
उनके PBL कार्य को उनके छात्रों ने जापान के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पेश किया था. डॉ. अर्चना शुक्ला ने भी छात्रों के साथ किए गए अपने कार्य को एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पेश किया था. उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने पहली बार वैज्ञानिक शोध को शोध-पत्र के रूप में प्रकाशित करने की दिशा में कदम बढ़ाया. उनके छात्रों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न विज्ञान और पर्यावरण प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल किए हैं. गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में उनका कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है. उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने कई वर्षों के प्रयोग के आधार पर भारत के पहले वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित गौरैया घरों के मॉडल विकसित किए.
इन गौरैया घरों की मांग आज केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों से भी इनके लिए रुचि और मांग सामने आ रही है. इस कार्य के जरिए से छात्रों ने यह सीखा कि विज्ञान केवल किताबों में पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम भी है.
शिक्षण में वे Art Integrated Learning और गतिविधि-आधारित शिक्षण को भी विशेष महत्व देती हैं. कला, स्थानीय संसाधनों, मॉडल निर्माण, रचनात्मक गतिविधियों और अनुभवात्मक अधिगम को विज्ञान के साथ जोड़कर वे छात्रों के लिए सीखने को अधिक रोचक और प्रभावी बनाती हैं, उनका लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले छात्रों तैयार करना नहीं, बल्कि रचनात्मक, आत्मविश्वासी, वैज्ञानिक सोच वाले, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है.
10 देशों से आए शिक्षकों को भी है ट्रेनिंग
डॉ. अर्चना शुक्ला का योगदान केवल अपने विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है. वे मध्य प्रदेश की State Resource Person के रूप में विज्ञान एवं Project-Based Learning के क्षेत्र में टीचरों को ट्रेनिंग देती हैं. इसके अलावा उन्होंने 10 देशों से आए शिक्षकों को भी Project-Based Learning की ट्रेनिंग दी है, जिससे उनके शैक्षणिक कार्य की पहुंच अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची है.
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